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भाजपा विकास के नाम पर खाली कराएगी जमीनें… फिर बिल्डरों की झोली में डाल देगी… राज ठाकरे का जोरदार हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

झूठे हिंदुत्व वाली भाजपा ने केवल जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बहला-फुसला कर सत्ता हासिल की है। विकास के नाम पर जमानें खाली कराने और फिर उसे बिल्डरों की झोली में डालने का काम भाजपा कर रही है। आज भाजपा में अपने निष्ठावानों की कोई कदर नहीं है। बाहरी नेताओं को आयात करना पड़ रहा है। तपोवन में पेड़ों की कटाई से पहले भाजपा ने अपने ही दल के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की ‘छंटनी’ कर दी। ऐसा जोरदार हमला मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने किया। नासिक में आयोजित पहली संयुक्त सभा में राज ठाकरे बोल रहे थे।
भाजपा के पास कार्यकर्ता नहीं, करना पड़ता है आयात
नासिक में आयोजित पहली संयुक्त सभा में राज ठाकरे ने भाजपा और देवेंद्र फडणवीस पर जोरदार प्रहार किया। राज ठाकरे ने जनता से अपील करते हुए कहा कि अगर आप चाहते हैं कि भविष्य में आपके बच्चों को यह न कहना पड़े कि १,५०० रुपए के लिए हमारे माता-पिता बिक गए तो शिंदे गुट और भाजपा के उम्मीदवारों को वोट मत दीजिए।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में ६०-७० नगरसेवक निर्विरोध चुने गए। इसके लिए कितना पैसा खर्च किया गया? कल्याण में एक ही परिवार के तीन उम्मीदवारों को १५ करोड़ रुपए की पेशकश की गई। इतना पैसा आखिर आता कहां से है?
उन्होंने कहा कि १९५२ में स्थापित जनसंघ को २०२६ में किराए पर कार्यकर्ता लेने पड़ रहे हैं। क्या आपके अपने कार्यकर्ता नहीं थे? कहीं-कहीं ऐसा हो तो समझ आता है, लेकिन यह हर जगह चल रहा है। इसमें आपके निष्ठावान कार्यकर्ताओं को सिर्फ काम करने के लिए छोड़ दिया गया है। लकड़हारे की कहानी सुनाते हुए राज ठाकरे ने कहा कि लकड़हारे से देवी ने पूछा था। सोने की कुल्हाड़ी है या चांदी की? लेकिन वह भी लालच में नहीं आया। यहां उल्टा हो रहा है। तपोवन के पेड़ काटने से पहले भाजपा ने अपने ही दल के लोगों और कार्यकर्ताओं की छंटनी कर दी और अब बाहर से लोग लाए जा रहे हैं। उन्होंने सीएम फडणवीस पर हमला बोलते हुए कहा कि देवेंद्र फडणवीस नासिक आए और बोले कि वे नासिक को गोद लेंगे। नासिकवासी उनके झांसे में आ गए और हमारी सत्ता के दौरान किए गए काम भूल गए, लेकिन शहर को ‘गोद लेने’ वाले फडणवीस उसके बाद फिर कभी नासिक लौटकर आए ही नहीं।
कुंभ मेले की आड़ में भारी भ्रष्टाचार
२०१२ में हमारी सत्ता के दौरान कुंभ मेले का आयोजन हुआ था। उसका नियोजन बेहद उत्कृष्ट था और उसके लिए एक भी पेड़ नहीं काटा गया। उस समय के नगरसेवकों और प्रशासकों का सम्मान किया गया। फिर अब क्या हो गया? भाजपा का सब कुछ पहले से तय रहता है। जमकर भ्रष्टाचार की योजना शुरू है। कुंभ मेले के नाम पर पहले पेड़ काटो, फिर साधुओं के लौटने के बाद वही जमीन उद्योगपतियों के हवाले कर दो, इस बीच तमाम काम के लिए टेंडर में जमकर कमीशन खोरी शुरू है। यह पूरा खेल पहले से तय होता है।

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