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महिला डिब्बों में सुरक्षा पर सवाल…लोकल के महिला कोच में फेरीवालों का कब्जा

 जेदवी / मुंबई

महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे और गृह विभाग के तमाम दावे एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के महिला डिब्बों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बाद देर रात पुलिस, महिला सिपाही, महाराष्ट्र सुरक्षा बल या होमगार्ड की तैनाती के आदेश जारी किए गए थे। मकसद साफ था महिलाओं को सुरक्षित सफर देना, लेकिन शुक्रवार रात ९:२३ बजे चर्चगेट से बोरीवली जाने वाली लोकल ट्रेन ने इन आदेशों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी। प्रथम श्रेणी के महिला डिब्बे में न तो पुलिस दिखाई दी, न ही कोई सुरक्षा बल। इसके उलट, डिब्बा वाघरी समुदाय के लोगों और फेरीवालों से भरा हुआ था। हालत यह थी कि नियमित यात्रियों को खड़े होने तक की जगह नहीं मिल पाई। इस लापरवाही ने यात्रियों के मन में डर और गुस्सा दोनों बढ़ा दिए हैं। हाल ही में एक युवती को चलती ट्रेन से फेंकने की घटना के बाद सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन शुक्रवार रात का दृश्य बताता है कि आदेश सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं। प्रथम श्रेणी के डिब्बों में न तो अतिरिक्त सुविधा मिलती है और न ही अनुशासन। इसके बावजूद पीक अवर्स में भारी लगेज लेकर फेरीवाले और बाहरी लोग धड़ल्ले से घुस आते हैं।

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