संदीप पांडेय / मुंबई
मनपा चुनाव का बिगुल बजते ही साकीनाका स्थित वार्ड क्रमांक १६४ का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से मैदान में उतरे साईनाथ साधू कटके को समाज के हर वर्ग से व्यापक और उत्साहपूर्ण समर्थन मिलता नजर आ रहा है। जनसभाओं और प्रचार यात्राओं में उमड़ रही भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत दे रही है कि क्षेत्र की जनता इस बार बदलाव नहीं, बल्कि भरोसेमंद नेतृत्व को चुनने के मूड में है।
साईनाथ साधू कटके की सभाओं में महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों, व्यापारी वर्ग और श्रमिक तबके की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। हर गली-मोहल्ले में उनके समर्थन में नारे और उत्साह का माहौल है। प्रचार अभियानों के दौरान लोग स्वयं आगे बढ़कर उनका स्वागत कर रहे हैं, जिससे पूरे वार्ड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया है। बताया जाता है कि साईनाथ साधू कटके पिछले दस वर्षों से अधिक समय से क्षेत्र में निरंतर समाजसेवा में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने पानी, सड़क, सफाई, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य बुनियादी नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद, युवाओं को दिशा देने वाले कार्यक्रम और महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े उनके कार्यों ने उन्हें जनता के बीच एक भरोसेमंद और सुलभ नेता के रूप में स्थापित किया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कटके का जमीनी जुड़ाव और हर समस्या को व्यक्तिगत रूप से सुनने की आदत उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग बनाती है। वे केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि वर्ष भर क्षेत्र में उपस्थित रहते हैं और लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं। यही कारण है कि उन्हें काम करने वाला नेता कहा जाने लगा है।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता को देखकर विरोधी खेमे में बेचैनी और मायूसी साफ झलकने लगी है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यदि यही रुझान बना रहा तो वार्ड १६४ में मुकाबला एकतरफा हो सकता है।
कटके में भविष्य देख रहे लोग
जनता के बीच यह आम धारणा बन चुकी है कि इस बार नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में जाना चाहिए, जिसने जमीन पर रहकर काम किया हो और जो हर वर्ग की आवाज बन सके। वार्ड १६४ में इन दिनों हर चौराहे, हर गली और हर सभा में एक ही चर्चा है कि कटके ही हमारे वार्ड का भविष्य हैं। बढ़ता जनसमर्थन और जनता का स्पष्ट झुकाव यह संकेत दे रहा है कि इस बार चुनाव केवल जीत-हार का नहीं, बल्कि भरोसे और सेवा की राजनीति का जनमत बनने जा रहा है।
