सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिंदे गुट की असल सोच बेनकाब हो गई है। अहिल्यानगर की जनसभा में शिंदे गुट के मंत्री गुलाबराव पाटील ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने सत्ता, कानून और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले मंच से मंत्री ने स्वीकार किया कि दादागीरी हमारा धंधा है और संकेतों-संकेतों में यह भी कहा कि मंत्री और विधायक बनने के लिए ऐसे रास्तों से गुजरना पड़ता है।
पाटील ने कहा कि अहिल्यानगर में पुलिस पिस्तौल के दम पर दादागीरी कर रही है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि दादागीरी की भाषा हमें मत सिखाओ, वह धंधा हमारा है। एक संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री के इस बयान ने सत्ता के संरक्षण में चल रही दबंगई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पाटील यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि वे यूं ही विधायक नहीं बने हैं और ३०२, ३०७ जैसी गंभीर धाराएं क्या होती हैं, यह उन्हें भली-भांति पता है।
