-एक दिन पूर्व बनाया था मनोनीत नगरसेवक
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई से सटे बदलापुर के बहुचर्चित बाल यौन शोषण प्रकरण में सह-आरोपी तुषार आपटे को मनोनीत नगरसेवक बनाए जाने का पैâसला भाजपा को भारी पड़ा है। न्यायालय से जमानत पर बाहर घूम रहे गंभीर पोक्सो आरोपी को नगरसेवक बनाए जाने पर चौतरफा आलोचना झेल रही भाजपा आखिरकार बैकफुट पर आ गई। मनोनीत किए जाने के महज एक दिन बाद ही तुषार आपटे को इस्तीफा देना पड़ा।
शुक्रवार को कुलगांव-बदलापुर नगर परिषद की कार्यकारिणी बैठक में भाजपा ने आपटे को स्वीकृत नगरसेवक नियुक्त किया था, लेकिन जैसे ही यह निर्णय सार्वजनिक हुआ, बदलापुरवासियों में जबरदस्त आक्रोश पैâल गया। इस मुद्दे पर शिवसेना के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। दानवे ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘पार्टी विद डिफरेंस’ ने आरोपी को सीधे राजनीतिक पद देकर यह साबित कर दिया है कि घटना के ४४ दिन बाद गिरफ्तारी क्यों हुई? अब जनता सब समझ चुकी है।
अपराधियों को राजाश्रय
पहले एमआईएम, फिर कांग्रेस के साथ गठबंधन और अब सीधे अपराधियों को राजाश्रय, यह भाजपा के मनमाने और बेशर्म कारभार का तीसरा एपिसोड है। ‘भयमुक्त महाराष्ट्र’ जैसे नारे क्या केवल खोखले जुमले हैं और अपराधियों को संरक्षण देना ही भाजपा का असली एजेंडा बन चुका है?
क्या था मामला
अगस्त २०२४ में बदलापुर के एक स्कूल में दो मासूम बच्चियों के साथ हुए अमानवीय यौन अत्याचार ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में मुख्य आरोपी अक्षय शिंदे का पुलिस द्वारा एनकाउंटर किया गया था। वहीं मामले को दबाने के आरोप में स्कूल के अध्यक्ष उदय कोतवाल और सचिव तुषार आपटे के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत गंभीर अपराध दर्ज किए गए थे। दोनों आरोपी फरार हो गए थे।
