मुख्यपृष्ठनए समाचारशिंदे के कोपरी में सवालों की बाढ़... गठबंधन है पर दिशा नहीं!

शिंदे के कोपरी में सवालों की बाढ़… गठबंधन है पर दिशा नहीं!

-सड़क, पानी, ट्रैफिक और पुनर्वास जैसे मुद्दे जस के तस

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

मनपा चुनाव के मद्देनजर राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विधानसभा क्षेत्र में आनेवाले कोपरी में मतदाताओं ने सवालों की घेराबंदी कर राजनीतिक हलचल मचा दी है। कागज पर मजबूत दिखने वाला गठबंधन जमीनी स्तर पर दिशाविहीन नजर आ रहा है, जहां साझा एजेंडे के बजाय हर उम्मीदवार अपनी व्यक्तिगत रणनीति के सहारे मैदान में उतरता दिखाई दे रहा है। वर्षों से सड़क, पानी, ट्रैफिक और पुनर्वास जैसे बुनियादी मुद्दे जस के तस बने हुए हैं, जिन पर समाधान के बजाय केवल चुनावी चर्चाएं ही होती रही हैं। बीते अनुभवों ने मतदाताओं के मन में गहरा संदेह पैदा कर दिया है। ऐसे में कोपरी के नागरिक अब भावनाओं के बजाय जमीनी जवाबदेही के आधार पर मतदान करने के मूड में नजर आ रहे हैं।
मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि पर ठाणे स्थित कोपरी इलाके में राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। लेकिन इसके समानांतर स्थानीय मतदाताओं में गहरी उलझन भी साफ दिखाई दे रही है। आम नागरिकों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर मतदान किसे करें। महायुति में गठबंधन की राजनीतिक गणित भले ही कागज पर नजर आती हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर बिल्कुल अलग है। पार्टी विचारधारा और सामूहिक एजेंडे के बजाय व्यक्तिगत प्रचार, वोटों की जोड़-तोड़ और गुप्त रणनीतियों के चलते मतदाताओं का भ्रम और असमंजस लगातार बढ़ रहा है।
वर्षों से वैसी ही हैं मूलभूत समस्याएं
कोपरी क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। सड़कों की बदहाली, अनियमित जलापूर्ति, बढ़ता ट्रैफिक जाम, पुनर्वास परियोजनाओं की धीमी गति और नागरिक सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे हर चुनाव में उठते हैं। लेकिन समाधान के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलते हैं। ऐसी भावना नागरिकों में गहराती जा रही है।
आकलन कर रहे हैं वोटर
राजनीतिक दलों की ओर से प्रचार का तापमान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके उलट कोपरी के मतदाता अपेक्षाकृत शांत रहकर पूरे परिदृश्य का आकलन कर रहे हैं। यह बेचैनी अंतत: किसके खिलाफ जाएगी और अंतिम क्षणों में मतदाता क्या निर्णय लेंगे, इसका जवाब आने वाला मतदान ही देगा।

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