मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान : कुलपति जी री चुटकला इमरत कथा

रौबीलो राजस्थान : कुलपति जी री चुटकला इमरत कथा

बुलाकी शर्मा राजस्थान
माफ करिया म्हारा साहित्यकार बेलियां! म्हनै गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ रा कुलपतिजी तिल जितरा ई गलत कोनी लाग रैया है। विश्वविद्यालय अर साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली री भेळप में आयोजित सेमिनार रो विषय हो- ‘समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ में।’ कुलपति श्रीमान आलोकजी इण विषय रै ‘आलोक’ में ई उद्घाटण भासण देय रैया हा। बां री समझ में चुटकला कहाणियां ई हुवै। मंच री सोभा बणियोडा अर साम्हीं बिराजियोडा हिंदी रा मानीजता कथाकार महेश कटारे, जया जाद‌वानी, जयनंदन, संजीव कुमार दुबे, पैला रा कुलपति बसंत कुमार पंडा आद मस्ती सूं प्रवचन सुण रैया हा अर हिंदी रा नामी कथाकार मनोज रूपड़ा सीरियस हुयोड़ा बैठ्या हा। भीड़ में फकत मनोज रूपड़ा साम्हीं देखतां बां पूछ्यो वैâ आप म्हारी बात्यां सूं बोर तो कोनी हुय रैया हो?’
मनोजजी ई म्हनैं ‘सांसारिक जीव’ री ठौड़ निखालिस ‘संवेदनशील कथाकार’ लाग्या। नपैâ-नुकसान रो हिसाब लगायां बिना सीधी खळकाय दीवी, मेहरबानी कर’र मूल विषय माथै बात करो सा।
सत्यनारायण भगवान री बरत कथा उनमान भीड़ तो श्रद्धा भाव सूं कुलपति जी रा इमरत बचन सुण’र भाव-विभोर हुय रैई ही अर अ‍ेक ‘नादान-नासमझ जीव’ मुद्दै माथै बात करण री सीख देवै जणै बीं माथै रीस तो आवणी ई ही। कुलपति जी बां नै ‘भगत सभा’ सूं बारै जावण रो हुकम सुणा दियो पण बां री जमात रा साथी विरोध कोनी करियो। भगत बण’र कुलपति जी री चुटकला इमरत कथा रो लाभ लेंवता रैया। बे समझदार हा। बे जाणै कै कुलपति बां री रचनावां नै युनिवर्सिटी रै कोर्स में फिट करा सवैâ। बां माथै शोध कार्य करवा सकै। बां नै साहित्यिक अर अकादमिक जळसां री सोभा बणा सवैâ!
अबै तो जळसां रा वीडियो बणन लाग्या है पण तीस-पैंतीस साल पैला ओ चलन कोनी हो जणै ई म्हैं कुलपतिजी री आंकी-बांकी बात्यां साहित्यकारां नै भगती भाव सूं सुणतां देख्या है। म्हारै स्हैर बीकानेर रै महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय रा कुलपति अ‍ेक साहित्यिक जळसै में राजस्थानी साहित्यकारां सारू माड़ा बोल दिया। दूजा साहित्यकारां चुंकारो कोनी करियो पण राजस्थानी भासा रा पैला उपन्यासकार-चावा-ठावा साहित्यकार श्रीलाल नथमलजी जोशी सहन नीं कर सक्या अर विरोध करियो। बीं टैम लाज-सरम थोड़ी-घणी बच्योड़ी ही। सगळा लेखक, शिक्षक, पत्रकार, बुद्धिजीवी अ‍ेकजुट हुयनै डट’र कुलपति रो विरोध करियो अर बां नै माफी मांगणी पड़ी।
समय रो फेर है। बिलासपुर यूनिवर्सिटी रै कुलपति रो ‘प्रवचन’ सुणणिया साहित्यकार ओजूं मौनी बाबा बणियोड़ा है। हटावण री मांग दूजा कर रैया है। मौनी बाबा बणियोड़ा लेखक आपरै कहाणी-किस्सां में विरोध री बातां कर सकै पण मनोज रूपड़ा जियां खरी-खरी वैâय’र नुकसान उठावण री चूक कोनी कर सकैल

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