मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति करवा रही है मासूम बच्चों से प्रचार! ...शिकायत के बाद चुनाव...

महायुति करवा रही है मासूम बच्चों से प्रचार! …शिकायत के बाद चुनाव आयोग की टूटी नींद

– प्रशासन ने दी कार्रवाई की खोखली धमकी

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में महानगरपालिकाओं के चुनावों का प्रचार चरम पर है। राज्य के कई शहरों में महायुति और कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा ५ से १४ वर्ष की आयु के बच्चों को झंडे, बैनर और रैलियों में उतारने की शिकायतें मिली हैं। इसकी शिकायतें मिलने के बाद राज्य चुनाव आयोग की नींद टूटी है और उसने दिखावे के लिए कार्रवाई करने की खोखली चेतावनी दी है।
चुनाव आयोग का कहना है कि चुनावी जोश में कानून की लक्ष्मण रेखा लांघते हुए यदि नेताओं ने मासूम बच्चों को प्रचार में घसीटा तो अब सीधी फौजदारी कार्रवाई की जाएगी। प्रचार में बच्चों के इस्तेमाल पर प्रशासन ने सख्त डंडा उठाया है। साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग अलर्ट मोड में आ गया है और मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार पर कड़ी निगरानी तेज कर दी गई है, ताकि मासूमों का राजनीतिक इस्तेमाल किसी भी कीमत पर रोका जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल व किशोर श्रम एक्ट के तहत १४ वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का प्रचार या सार्वजनिक गतिविधि कराना अपराध है। इसके बावजूद कई इलाकों में बच्चों के हाथों में झंडे थमाए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं। आयोग के अनुसार, दोषी पाए जाने पर संबंधित उम्मीदवार और पार्टी पदाधिकारियों के खिलाफ फौजदारी मामला दर्ज किया जाएगा। साथ ही किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों ने दो टूक कहा है कि आगे यदि प्रचार के दौरान नाबालिग बच्चे पाए गए, तो उम्मीदवार ही सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को साफ संदेश है कि मासूमों को चुनावी रणभूमि से दूर रखें, वरना जेल का रास्ता तय है।

तुरंत रोका जाना चाहिए
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष प्रह्लाद गवारे ने कहा है कि चुनाव जीतने के लिए मासूम बच्चों का इस्तेमाल करना निंदनीय है। अगर किसी दल या उम्मीदवार से अनजाने में भी ऐसा हो रहा है, तो उसे तुरंत रोका जाना चाहिए। कानून से बड़ा कोई प्रचार नहीं हो सकता।

अन्य समाचार