सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा भरोसे, वचन और नैतिकता की नहीं, बल्कि सत्ता के लिए लोगों, संस्थाओं और राज्यों को इस्तेमाल कर किनारे लगाने की राजनीति कर रही है। आज की भाजपा सिर्फ इस्तेमाल करो और फेंक दो की राजनीति करती है। इस तरह का जोरदार हमला करते हुए शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनावी सभाओं में दी जाने वाली तथाकथित ‘गारंटी’ को खोखला बताते हुए आज की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगने वाली भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह गारंटी नहीं, बल्कि जनता को भ्रम में रखने का एक राजनीतिक जुमला बनकर रह गया है। ये ठाकरे के शब्द हैं। ये मोदी की ‘गारंटी’ नहीं है। ठाणे के रामगणेश गडकरी रंगायतन के बगल में आयोजित शिवशक्ति सभा में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की संयुक्त सभा हुई।
‘हमारा विरोध किसी भाषा से नहीं; दादागीरी से है!’
जो हमारे ही घर में घुसकर गुंडागर्दी कर रहा है, उसे उसी भाषा में जवाब नहीं दिया तो छत्रपति के राज्य की बात करने का क्या मतलब? हम सहनशील हैं और सबको अपना मानते आए हैं। लेकिन अपना मानते-मानते, जो लोग हम पर ही दादागीरी कर रहे हैं, उन्हें थोड़ा सबक सिखाया तो क्या गलत है? मराठी मेरी मां है, हिंदी मेरी मौसी है। लेकिन अगर मां मर जाए तो भी चलेगा, ऐसा कहने वाले गद्दार महाराष्ट्र में वैâसे चल सकते हैं?
‘जितना अंग्रेजों ने नहीं लूटा
उतना भाजपावाले लूट रहे हैं!’
ठाणे में कल शिवशक्ति की विराट सभा आयोजित हुई। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने संयुक्त रूप से इस सभा को संबोधित किया। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ महीने पहले नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बैंक में पैसे रखकर विकास नहीं होता, एफडी का कोई फायदा नहीं। देश अडानी के हाथों में देना है। मनपा को भिखारी बनाना है। सारे उद्योग गुजरात चले गए। ऑक्ट्रॉय बंद होने से जो आमदनी होती थी, वह भी बंद हो गई। अब मनपा वैâसे चलेगी? मैं मुख्यमंत्री था तब दिल्ली से पैसे नहीं मिलते थे। मनपाओं की तिजोरी ही खोद ली गई। अंग्रेजों ने जितना नहीं लूटा, उससे ज्यादा भाजपा वाले लूट रहे हैं। नगरसेवक पद के लिए करोड़ों रुपए बांटे जाते हैं। यह पैसा आखिर किसकी जेब से निकलेगा?
इस बीच उद्धव ठाकरे ने मंच पर ज्योति ताई को बुलाया, जिन्होंने पैसे का ऑफर ठुकराकर अपनी उम्मीदवारी कायम रखी। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में उम्मीदवारों से नाम वापस लेने के लिए करोड़ों रुपए दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हम एक साथ नहीं थे, तब सवाल पूछा जाता था कि कब एक होंगे। अब हम एक हो गए हैं, तब भी वही सवाल पूछा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि ठाणे में कभी बैलगाड़ी से चुनाव प्रचार होता था। २०१२ में आखिरी मनपा चुनाव हुए, जिस सभा में हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे ने भाषण दिया था। हमने उनसे कहा था कि सभा मत लीजिए, लेकिन बालासाहेब ने कहा था कि सिर्फ दो ही सभाएं होंगी, एक मुंबई में और दूसरी मेरे ठाणे में। बालासाहेब का ठाणे से गहरा लगाव था। एक बार भाषण के दौरान एक पर्ची आई, जिसमें लिखा था कि हमारे पास नाट्यगृह नहीं है। उन्होंने कहा कि मनपा दो, नाट्यगृह दूंगा और वैसा ही हुआ। काशीनाथ घाणेकर और गडकरी रंगायतन बने।
शिंदे सरकार ने ठाणे में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें विकास नहीं, बल्कि विनाश की गति दिखाई देती है। काम तत्परता से मंजूर किए जा रहे हैं। मुलुंड मेट्रो के कारण १०० से ज्यादा जगहों पर पर्यावरण को खतरा पैदा हुआ है। मुंबई में सांस लेना मुश्किल हो गया है। आनंद दिघे का नाम लेने वाले लोग हेलिकॉप्टर से पांच-सितारा खेतों में जाएंगे, दूसरे नागपुर भागेंगे और तीसरे कहेंगे कि काका, मुझे बचाओ। हम दोनों ही ठगे गए हैं।
– आनंद दिघे कहते थे कि गद्दारों को माफी नहीं, ठाणे के इस गद्दार को भी कभी माफी नहीं मिलेगी।
– उस गद्दार ने ठाणे के आपला दवाखाना में साड़ियों की दुकान बना दी है। उस गद्दार को साड़ी पहनाकर उसका जुलूस निकालो।
– एक दिन ऐसा आएगा, ये तीनों के तीनों गायब हो जाएंगे। एक फाइव स्टार खेत में चला जाएगा, दूसरा नागपुर और तीसरा ‘काका मुझे बचाओ’ कहते हुए भाग जाएगा।
– चुनाव से पहले घर-घर में पॉकिट पहुंच रहे हैं। ऐसा लगता है कि शायद यह अंतिम चुनाव है।
– इनका षड्यंत्र देश को पूरी तरह से अडानी को सौंप देने का है।
ठाणे से भी गद्दारी
जो व्यक्ति शिवसेना से गद्दारी करता है, वही अब ठाणे से भी गद्दारी कर रहा है, यह कहते हुए उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा। उन्होंने बावनकुले की भी आलोचना की। उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए मेरे कार्यकाल में जितना जंगल बढ़ाया गया, उतना किसी ने नहीं किया। गणेश नाईक ने तेंदुओं को लेकर शूट ऐट साइट का आदेश दिया था। लेकिन जो जंगल की जमीन पर हस्ताक्षर करके उसे बेच रहा है, उस पर शूट ऐट साइट की कार्रवाई करने की हिम्मत वन मंत्री गणेश नाइक दिखाएंगे क्या?
