मुख्यपृष्ठस्तंभराज ‘तंत्र’ : बोतल में बंद घोटाले का जिन्न!

राज ‘तंत्र’ : बोतल में बंद घोटाले का जिन्न!

अरुण कुमार गुप्ता

राज्य के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की बात हो, और घोटाले की चर्चा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। पूर्व में अजीत पवार पर करीब ७० हजार करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप में भले ही क्लीनचिट मिल गई हो, लेकिन समय-समय पर इसकी चर्चा हो ही जाती है। यहां यह बात याद करने वाली है कि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान वर्तमान में सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छाती फुलाकर कहा था कि ७० हजार करोड़ का सिंचाई घोटाला करने वाले अजीत पवार हमारी सरकार बनने के बाद जेल में ‘चक्की पिसिंग, चक्की पिसिंग’, लेकिन बाद में ऐसे तीखे शब्दबाण चलाने वाले फडणवीस बाबू भूल गए या फिर यह समझ बैठे कि जनता को चूरन देना था सो दे दिया। समय के साथ जनता भी भूल गई होगी, लेकिन जनता से क्या छुपा है। अब बात थोड़ी सत्ता की मलाई की कर लेते हैं। पहले की बात आई गई हो गई। जब फडणवीस की सरकार बनी तो उन्हीं अजीत पवार को उप मुख्यमंत्री ही नहीं वित मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग से नवाज दिया गया। यही नहीं उन्हें घोटाले से भी क्लीनचिट मिल गई। ऐसे में अब अजीत पवार सीना क्यों नहीं फुलाएं। आखिर उनको दादा ऐसे थोड़े ही न कहा जाता है। सो गत दिनों पुणे के पिंपरी-चिंचवड में प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि उन पर ७० हजार करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप लगाए गए, लेकिन जिन लोगों ने ये आरोप लगाए, उन्हीं के साथ वे आज सरकार में बैठे हैं। अजीत पवार के इस बयान से बीजेपी खेमे में खलबली तो मचनी ही थी, सो मच भी गई। सबसे पहले बयान आया भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण का। इसके बाद राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने धमकी भरे लहजे में अजीत पवार को चेतावनी दे डाली। बावनकुले ने कहा कि ज्यादा उड़ो मत, अगर हमने पिछली फाइलें और पुराने पन्ने पलटने शुरू कर दिए, तो बोलने की हालत में भी नहीं रहेंगे। बावनकुले ने यहां तक कह दिया कि ७० हजार करोड़ के घोटाले का पैâसला अभी अदालत में लंबित है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अब इसे क्या कहा जाए, भाजपा की धमकी या फिर मुंह बंद कराने का तरीका। जो भी हो एक बात तो जरूर है कि अजीत पवार की दादागीरी रोकने के लिए भाजपा ने बोतल में घोटाले का जिन्न बंद कर रखा है।
स्तरहीन बयानबाजी!
राज्य में महानगरपालिकाओं के चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते गए, वैसे-वैसे नेताओं की स्तरहीन बयानबाजी भी सामने आती गई। यदि पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी हो तो बात समझ में आती है, लेकिन यदि साथ में सत्ता की मलाई खाने वाले दो दलों के नेता एक दूसरे को नंगा करने पर तुल जाएं तो किसी भी हालत में उचित नहीं कहा जा सकता है। हाल ही में घाती यानी शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हस्के ने राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘साठी की बुद्धि, नाठी’ यानी उम्र बढ़ने के साथ समझ खत्म हो जाती है। अब हमेशा आर-पार के मूड में रहने वाले गणेश नाईक कहां पीछे रहने वाले थे। शिंदे गुट के हमलों का जवाब देते हुए गणेश नाईक ने एक कार्यक्रम में दो टूक शब्दों में कहा कि राजनीति में उम्र नहीं, काम और अनुभव मायने रखता है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी करने वालों के पास विकास का कोई एजेंडा नहीं है, इसलिए वे स्तरहीन बयानबाजी पर उतर आए हैं। मुझे अगर भाजपा के शीर्ष नेताओं का आदेश मिले तो शिंदे की दोनों टांगे ऊपर कर दूं। नई मुंबई में अब मुकाबला सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि स्तरहीन बयानबाजी का हो गया है। भाजपा और शिंदे गुट के बीच चल रही यह आक्रामक बयानबाजी चुनाव बाद भी तेज होने का संकेत दे रही है। इस स्थिति में यही कहना उचित होगा कि राज्य में सत्ता की मलाई खाने के लिए तो साथ-साथ हैं। इसके बावजूद इस तरह की स्तरहीन बयानबाजी करके जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं।

५० खोखे एकदम ओके!
कुछ वर्ष पहले ‘५० खोखे एकदम ओके’ वाला पोल-खोल का स्लोगन काफी हिट हुआ था। हर जगह या फिर राजनीति के गलियारों में यही चर्चा चल रही थी कि ‘५० खोखे एकदम ओके’। समय था हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना से घात कर अलग होने का। घात कर अलग कोई और नहीं, बल्कि शिवसेना के सबसे विश्वसनीय माने जाने वाले एकनाथ शिंदे हुए थे, जो अपने साथ कुछ विधायकों को भी लालच देकर घात में शामिल कर लिए। यह बात यहीं खत्म नहीं हुई। समय-समय पर घातियों को इसकी याद भी दिलाई जाती रही है। जिसके लिए शिंदे ने घात किया यानी सत्ता की मलाई खाने के लिए भाजपा का साथ लिया अब उसी भाजपा के कार्यकर्ता शिंदे को घात की याद दिलाते हुए कह रहे हैं कि ‘५० खोके एकदम ओके’। यानी आईना दिखा रहे भाजपा कार्यकर्ता स्वाभिमान की तिलांजलि देने वाले शिंदे की एक तरह से पोल खोल रहे हैं। बताया जाता है कि वार्ड क्र. १७३ में प्रचार के दौरान भाजपा और शिंदे गुट के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए नारों ने शिंदे गुट को असहज कर दिया और उनके कार्यकर्ताओं में खलबली म्ाच गई। भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा ‘५० खोके एकदम ओके’ नारा लगाए जाने से शिंदे गुट की नैतिकता पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने बिना किसी आधिकारिक बयान के जमीनी स्तर पर शिंदे गुट को आईना दिखाने का काम किया है। मुंबई की सियासत में ‘५० खोखे’ का नारा अब केवल नारा नहीं, बल्कि शिंदे गुट की राजनीति पर सीधा प्रहार के साथ ही पोल खोलने वाला है।

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