उमेश गुप्ता / वाराणसी
मकर संक्रांति के पावन पर्व की दस्तक के साथ ही काशी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान एक बार फिर जीवंत हो उठी। दशाश्वमेध घाट के सामने गंगा की रेती ‘भाक्काटे…भाक्काटे’ के शोर से गुलजार हो गई। अवसर था नगर निगम वाराणसी द्वारा आयोजित दो दिवसीय भव्य पतंग प्रतियोगिता के शुभारंभ का, जहां परंपरा, रोमांच और बनारसी स्वाद का अद्भुत संगम देखने को मिला।
सुहावनी धूप के बीच आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया। रेती पर एक ओर पतंगबाजों के बीच पेंच लड़ रहे थे, तो दूसरी ओर बनारसी कचौड़ी और गरमा-गरम जलेबी की खुशबू माहौल को और भी खास बना रही थी। यह आयोजन काशी की उस पुरातन परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास था, जो कभी मकर संक्रांति के साथ पूरे शहर की पहचान हुआ करती थी। एक समय था, जब मकर संक्रांति से पहले ही हर छत से ‘भाक्काटे’ की आवाज सुनाई देती थी, लेकिन आज के युवा मोबाइल और रील की दुनिया में उलझकर अपने पारंपरिक खेलों से दूर हो रहे हैं। नगर निगम का यह प्रयास इसी विरासत को फिर से जीवित करने की दिशा में है,” उन्होंने कहा।
अगले वर्ष से राष्ट्रीय स्तर पर होगी प्रतियोगिता
महापौर ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अगले वर्ष से इस पतंग प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया जाएगा। देशभर के पतंगबाज ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से इसमें भाग ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि पुरस्कार राशि को भी ऐतिहासिक रूप दिया जाएगा।
प्रथम पुरस्कार: 5 लाख रुपये
द्वितीय पुरस्कार: 2.51 लाख रुपये
तृतीय पुरस्कार: 1.51 लाख रुपये
आसमानी युद्ध में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं टीमें
प्रतियोगिता के पहले चरण में 16 टीमों के बीच कुल आठ मुकाबले खेले गए।
13 जनवरी को सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले गए।जिनमें बनारस काइट क्लब, फायर काइट क्लब, एयर लाइन्स काइट क्लब और स्काई लाइन काइट क्लब खिताब के लिए आमने-सामने होंगे।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में पार्षद सुरेश कुमार चौरसिया, प्रवीन राय, चंद्रनाथ मुखर्जी, राजेश यादव ‘चल्लू’, विवेक कुशवाहा, सिंधु सोनकर, संजय गुजराती, कनकलता मिश्रा, मदन मोहन दुबे, सीमा वर्मा, विजय द्विवेदी सहित अन्य पार्षदों के साथ अपर नगर आयुक्त सविता यादव एवं नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।
