-सुरक्षा रक्षक मंडल के अधिकारी बेपरवाह…आरटीआई में जवाब देने से विभाग का इनकार
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई और ठाणे जिला में लगभग १० लाख सिक्योरिटी गार्ड हैं। जिनमें से मात्र ४ प्रतिशत ही पंजीकृत हैं। सरकारी सूची में बाकी की कोई जानकारी नहीं है। जबकि ऐसे सिक्योरिटी गार्डों के हक और अधिकारी के लिए सुरक्षा रक्षक बोर्ड का गठन किया गया है। उनका शोषण न हो और व्यवस्थित तरीके से युवाओं को रोजगार मिले, इस उद्देश्य से बना यह बोर्ड अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। जी हां, इस बोर्ड में गार्डों के लिए खरीदी गई सामग्री, यूनिफॉर्म व सेफ्टी किट आपूर्ति, फाइल रैक, मशीन खरीद जैसे मामले अधिकारियों के व्यक्तिगत मामले बताए जा रहे हैं। आरटीआई के तहत इस विभाग में इनसे जुड़ी तमाम जानकारी देने से अधिकारियों ने साफ इनकार किया है। भ्रष्ट महायुति सरकार में मंत्री तो मंत्री, अधिकारी भी जमकर लूटने में व्यस्त हैं।
बोर्ड में गार्डों के लिए सामग्री की खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसे लेकर आरटीआई कार्यकर्ता विनोद घोलप ने बोर्ड से पूरी जानकारी मांगी है, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने इसे व्यक्तिगत बताकर पल्ला झाड़ लिया। अपील में अधिकारी जी नलिंदे ने भी वही जवाब दिया। घोलप ने कहा कि वे इस मामले को लेकर कोर्ट में जाएंगे। आखिर गार्डों के लिए बने बोर्ड की जानकारी व्यक्तिगत वैâसे हो सकती है? उन्होंने कहा कि बोर्ड के अध्यक्ष के खिलाफ शिकायत है। उन्हें बचाने के लिए जानकारी छुपाई जा रही है। मंडल अधिकारियों की इस मनमानी के खिलाफ कर्मचारी संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
बता दें बोर्ड में उक्त सामग्री खरीदी के लिए चुनिंदा ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। बोर्ड में एक तरफा मनमानी भर्ती में भी बड़ा भ्रष्टाचार है। कोरोना काल में जब सरकारी नियुक्तियों पर रोक थी, तब भी हजारों सुरक्षा रक्षकों की गैरकानूनी भर्ती की गई। मीरा रोड में १०० सुरक्षा रक्षकों की जगह लगभग ६०० की भर्ती की गई। सवाल है कि बोर्ड में ऐसा क्यों किया गया?
बोर्ड में कई खामियां
इस मामले में नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बोर्ड में कई खामियां हैं। कुछ जगह गड़बड़ी हो रही है। बड़े पैमाने पर भ्रष्टचार का अंदेशा है। शिकायतें आई हैं। शिकायत पत्र में सामग्री खरीदी और सुरक्षा रक्षक भर्ती घोटाले में आरोपी को तत्काल निलंबित कर स्वतंत्र एसआईटी जांच और विशेष ऑडिट की मांग की गई है। हालांकि, अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
