सूरज सिंह
माया डोलस का जन्म १५ अक्टूबर १९६६ को बंबई (मुंबई) की झुग्गियों में विठोबा और रत्ना प्रभा डोलस के घर हुआ। वह अपने माता-पिता के छह बच्चों में से एक था। उसने आई.टी.आई. तक शिक्षा प्राप्त की।
शुरुआत गरीबी से हुई थी, मगर रुझान अपराध की ओर बढ़ता गया। सन १९८० में डोलस अशोक जोशी गैंग से जुड़ गया। देखते ही देखते वह गैंग में तेजी से ऊपर उठा और कांजुर गांव सहित कई इलाकों में जबरन वसूली के रैकेट चलाए। यह गैंग भायकला कंपनी से भी जुड़ा हुआ था। इसके बाद डोलस डी-कंपनी के डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए काम करने लगा। उसके साथ दिलीप बुवा जैसे पेशेवर और बेहद खतरनाक शूटर भी मौजूद थे।
बाद के विवाद और आरोप
कहा गया कि एनकाउंटर के दौरान एटीएस ने ७० लाख रुपए कैश बरामद किए थे, लेकिन बाद में १५ लाख रुपए हड़पने के आरोप लगे। हालांकि, मुंबई पुलिस की कई जांचों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
वास्तविकता बनाम छवि
एनकाउंटर के दौरान माया डोलस ज्यादा शोर, गालियां और लापरवाही करता था, जबकि दिलीप बुवा बेहद शांत, निशानेबाज और पेशेवर था। आफताब अहमद खान ने और ‘मीडिया ने डोलस को बड़ा गैंगस्टर बना दिया। बुवा असली कातिल और गोली चलाने में सबसे आगे था।’
२००७ में आई फिल्म ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ में विवेक ओबेरॉय ने माया का किरदार निभाया और अमृता सिंह ने डोलस की मां रत्ना का। इस फिल्म पर माया की मां रत्ना प्रभा डोलस ने कोर्ट में अपील की, यह कहते हुए कि फिल्म तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है, उसके बेटे को गलत रूप में दिखाया गया है। असल में उसके पिता १९९७ तक जीवित थे, न कि बचपन में डोलस द्वारा मारे गए।
छोटा राजन ने भी फिल्म का विरोध किया, जबकि आफताब खान ने तथ्यों को सही बताया। अंतत: कोर्ट ने मई २०१२ में फिल्म पर बैन लगाने से इनकार कर दिया।
माया डोलस वास्तविकता में उतना बड़ा मास्टरमाइंड नहीं था, जितना फिल्मों और मीडिया ने दिखाया। वह दाऊद के लिए काम करने वाला एक उग्र, बेरहम और लापरवाह शूटर था, जिसने गलत राह चुनी और २५ की उम्र में गोलियों से छलनी हो गया।
लोखंडवाला शूटआउट
सन १९९१ में अंधेरी स्थित लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स के स्वाति ए विंग (फ्लैट नंबर ००२ और ००३) में माया डोलस, दिलीप बुवा और अन्य साथी मौजूद थे। यह उसी समय की बात है जब डाऊद के लिए काम करने वाला गोपाल रजवानी वहां फ्लैट ले चुका था। १६ नवंबर १९९१ को एडिशनल पुलिस कमिश्नर आफताब अहमद खान के नेतृत्व में मुंबई पुलिस ने उस इमारत को घेर लिया। कहा जाता है कि डाऊद इब्राहिम ने ही पुलिस को सूचना दी, क्योंकि वह चाहता था कि डोलस और बुवा खत्म कर दिए जाएं। इसके बाद चला ४ घंटे का लंबा मुठभेड़, जिसका अधिकांश हिस्सा टीवी चैनलों पर लाइव प्रसारित हुआ। इस एनकाउंटर में माया डोलस को १०० गोलियां लगीं और वहीं उसकी मौत हो गई। तब उसकी उम्र मात्र २५ वर्ष थी।
