-३६५ दिनों में ७७६ प्रतिबंधित पक्षी बरामद
-तस्करी में अब तक सिर्फ ४ कार्रवाई, ७ गिरफ्तारी
वाराणसी जिले में वन विभाग की लापरवाही के चलते प्रतिबंधित पक्षियों का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। बीते एक साल में वन विभाग ने पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए ७७६ प्रतिबंधित पक्षियों को बरामद किया है। हैरानी की बात यह है कि चार बार की गई बड़ी कार्रवाई के बावजूद तस्करी में लिप्त केवल सात तस्करों की ही गिरफ्तारी हो सकी है। इससे अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं। इस मामले में अब वन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
बता दें कि एक साल में वन विभाग ने पुलिस के साथ कार्रवाई में ७७६ प्रतिबंधित पक्षियों को पकड़ा है। हैरानी की बात यह है कि चार बार की गई कार्रवाई के बावजूद केवल सात तस्करों की गिरफ्तारी हो सकी है। इस पूरे नेटवर्क के डीलरों और मुख्य सरगनाओं तक वन विभाग नहीं पहुंच पाया है। वन विभाग पुलिस की कार्रवाई में शामिल होकर अपनी उपलब्धियां गिनाने में जुटा है, जबकि हकीकत यह है कि विभाग की ओर से पक्षियों के संरक्षण और तस्करी रोकने के लिए कोई ठोस अभियान नहीं चलाया गया।
बता दें कि जनवरी २०२६ में वैंâट स्टेशन पर पंजाब मेल से अमेठी से पश्चिम बंगाल ले जाए जा रहे करीब ४०० जंगली तोते बरामद किए गए, जिसमें तस्कर मोहम्मद जाहिद गिरफ्तार हुआ। नवंबर २०२५ में एसटीएफ ने वाराणसी से पश्चिम बंगाल ले जाए जा रहे २४५ तोते और १२ मोर के साथ ४ तस्करों को पकड़ा, जो कौशांबी और प्रतापगढ़ से पक्षी खरीद रहे थे। मई २०२५ में बहेलिया टोला में छापेमारी के बाद ९० प्रतिबंधित पक्षी बरामद किए। इस बीच एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था।
बहेलिया टोला प्रतिबंधित
पक्षियों का हॉटस्पॉट
वन विभाग की सुस्ती का सीधा फायदा तस्कर उठा रहे हैं। जिले के सिगरा, लक्सा, मैदागिन, गुरुबाग, राजघाट जैसे कई इलाकों में खुलेआम प्रतिबंधित पक्षियों की खरीद-फरोख्त हो रही है। सबसे गंभीर स्थिति आदमपुर क्षेत्र के बहेलिया टोला की है, जहां करीब ५० दुकानों पर कछुए, लाल चिड़िया, अमेरिकन लव बर्ड्स समेत कई संरक्षित प्रजातियों की खुलेआम बिक्री हो रही है। बहेलिया टोला प्रतिबंधित पक्षियों का हॉटस्पॉट बना हुआ है।
