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३६ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी प्रशासन कर रहा …उबर बाइक टैक्सी पर मेहरबानी!

-परिवहन विभाग कटघरे में
-गिग वर्कर्स ने बजाया विद्रोह का बिगुल

जेदवी / मुंबई
मुंबई में ई-बाइक टैक्सी के नाम पर चल रही अवैध और जानलेवा यात्री परिवहन सेवाओं पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘इंडियन गिग वर्कर्स प्रâंट’ का आरोप है कि निर्दोष नागरिकों की जान जाने के बावजूद संबंधित कंपनियों को सरकारी संरक्षण मिल रहा है। जिन बाइक टैक्सी कंपनियों के खिलाफ करीब ३६ एफआईआर दर्ज हैं, जिनके अस्थायी परमिट रद्द करने को लेकर परिवहन मंत्री सार्वजनिक बयान दे चुके हैं, उन्हीं कंपनियों की सेवाओं का सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में सार्वजनिक उद्घाटन होना बेहद गंभीर और संदेहास्पद बताया जा रहा है।
मुंबई जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले, दुर्घटना-प्रवण और संकरे रास्तों वाले शहर में बाइक टैक्सी चलाना केवल नीतिगत भूल नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नागरिकों की जान से खिलवाड़ है। ‘इलेक्ट्रिक वाहन’ का लेबल लगाकर यात्रियों की सुरक्षा, चालकों के संरक्षण, बीमा व्यवस्था और कानूनी ढांचे की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, उबर से जुड़ी बाइक टैक्सी सेवाओं के संचालन के दौरान दो निर्दोष मुंबईकरों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद ऐसे संचालन को अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। गिग वर्कर्स प्रâंट की मांग है कि मुंबई में बाइक टैक्सी संचालन की पूरी कानूनी स्थिति तत्काल सार्वजनिक की जाए। सभी संबंधित कंपनियों के परमिट, बीमा, चालक प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों की सार्वजनिक जांच हो। जांच पूरी होने तक बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़े सभी प्रचार और उद्घाटन कार्यक्रमों पर रोक लगे। विवादित और जानलेवा संचालन को समर्थन देने वाले अधिकारियों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इंडियन गिग वर्कर्स प्रâंट ने दी चेतावनी
प्रâंट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि गिग वर्कर्स, बाइक चालक, रिक्शा चालक, वैâब चालक और सामान्य यात्री किसी कॉर्पोरेट प्रयोग की बलि नहीं बन सकते। यदि सुरक्षा, पारदर्शिता और कानून का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन करने को बाध्य होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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