एड. राजीव मिश्र मुंबई
आज से चुनाव परचार बंद होइ जाई चलो कम से कम दिमाग के शांति मिली जाई, लम्बी साँस लेति गोबर्धन बोले। हाँ, तुमका तो शांति मिलि गय पर इहाँ हमरा आवक बंद होइ गवा ओहिका का? उहीं बगल में बइठा गोबर्धन के छोटका लड़िका बोलि परा। हाँ-हाँ काहें नहीं, तुम दुइ पांच सौ रूपया से हवेली खड़ा कइ लिहो न? दुइ बीरा पान अउर एक पुरवा चाय पे तुम बिकाय गयो है। समाज के का मुंह देखइबो, जब लोग कही कि गोबर्धन के लरिका वोटिंग में बिकाय गवा? अइसन है तुम बइठ के नैतिकता के झुनझुना बजाओ जब जेब मा चार पइसा रही तब्बय अदमी, अदमी के इज्जति करत है। आज के बाद तुम्हरे जेब मा कहाँ से आयी चार पइसा जवने से तुम्हारी इज्जति बाढ़ी। अरे भइया, जब नगरसेवक होइ जइहैं तो वार्ड के सबके सब ठीका हमरे जेब में रही। एक बरिस मा देख्यो कइसे पइसा कय बरसात होत है। पर ऊ तुम्हार तब शुरू होइ जब तुम्हरे भइया जी जीति पईहैं तब न? हमका पता लगि रहा है कि उनकर जमानत जब्त होइ रही है। तुमका राजनीति का का पता? बीएस दुइ दिन रुकि जाओ फिरि देख्यो हमरे भइया के नाम के डंका बजी डंका। देखो अब कल का होत है, पर तुम ज्यादा बूथ पे उछल-कूदि न करिहौ नहीं तो अगर एक बार पुलिस के हत्थे चढ़ि गयो तब जब-जब पुरुआ बही तब-तब अइसन कसक उठी कि न उठि पइबा अउर न बैठि पइबा। तुम रहे देव हम आपनि देखि लेबय जब तक भइया हैं हमरा केउ बाल बांका नही कइ सकत है।
सुबह होतय छोटकना फटफटिया पर बईठ के बाहर निकरि गय। भइया जइसै समझाई रहें छोटकना अपने मिशन पे लागि गवा दुइ वोट डारे के बाद जैसय तिसरका वोट लइके बूथ पे पहुंचे सीआरपी के एक सिपाही इनका ताड़ी रहा अउर जइसै अंदर गए लाठी पे लाठी यतनी लाठी मारिस कि छोटकना खटिया पे लेटाय के घर पहुँचावा ग। चुनाव जीतब तो दूरि उनके प्रत्याशी भइया के जमानत जब्त होइ गयी अउर दुइ दिन बाद जेतना चाय-पान अउर पइसा दिए रहें सब के लिस्ट लइके गोबर्धन के पकड़ाई दिहेन अउर कहिन अब चुनाव के परिणाम आइ गवा है, यहिका पिरमिन्ट कल तक होइ जाए के चाही।
