सामना संवाददाता / मुंबई
प्रदेश की २९ मनपाओं के चुनाव के लिए आज वोटिंग होने वाली है। इसके चलते राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच उत्तर भारतीय समाज के लोग मुंबई-ठाणे सहित एमएमआर क्षेत्र की ९ मनपाओं में शिवसेना- मनसे की युति को समर्थन देने उतरेंगे। शिवसेना और मनसे को उत्तर भारतीय समाज से मिल रहे समर्थन ने सियासी चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और नागरिकों ने स्पष्ट किया कि वे आने वाले चुनाव में शिवसेना–मनसे गठबंधन को वोट करेंगे।
उत्तर भारतीय समाज के नंदलाल पांडे का कहना है कि मुंबई और ठाणे में लंबे समय से रहकर उन्होंने शहर के विकास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को करीब से देखा है। उनके अनुसार, शिवसेना और मनसे ने हमेशा स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता दी है और आम जनता की आवाज उठाई है। समाज के नीलेश राम यादव ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि मुंबई–ठाणे के भविष्य का चुनाव है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर भारतीय समाज मेहनतकश है और शहर के विकास में उसकी अहम भूमिका रही है। हमें ऐसी राजनीतिक ताकत चाहिए जो शहर की पहचान, कानून-व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करे। इस दृष्टि से शिवसेना–मनसे का नेतृत्व अधिक भरोसेमंद लगता है।
कई लोगों ने यह भी कहा कि चुनाव के समय केवल वादे करने वाली राजनीति से वे ऊब चुके हैं। उन्हें जमीन पर काम करने वाली और जनता से जुड़ी राजनीति चाहिए। शिवसेना–मनसे द्वारा संयुक्त रूप से स्थानीय मुद्दों पर उठाए गए सवालों और जनसंपर्क अभियानों का असर उत्तर भारतीय समाज में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। उत्तर भारतीय समाज के युवाओं ने भी रोजगार, परिवहन, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर शिवसेना–मनसे के रुख का समर्थन किया।
