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भाजपा ने किया सिंचाई घोटाले से भी १० गुना बड़ा है महामार्ग घोटाला!

अधिकारी ने ही लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
कांग्रेस ने जो ७० साल में नहीं किया, वो बीजेपी ने कर दिखाया
सामना संवाददाता / मुंबई
उप मुख्यमंत्री अजीत पवार द्वारा महायुति सरकार के कार्यकाल में हो रहे घोटाले की फाइल का उल्लेख करने के बाद राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई है। राज्य के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने इस मामले में राज्य की महायुति सरकार से तुलना करते हुए भाजपा सरकार को अधिक भ्रष्टाचारी बताया है। उन्होंने कहा कि यह सरकार ज्यादा भ्रष्ट है। सिंचाई घोटाले से १० गुना ज्यादा राज्य में महामार्ग घोटाला है। प्रदेश में सड़कें बनाने के नाम पर जितना बड़ा घोटाला हुआ है, उतना तो कांग्रेस ने ७० साल में नहीं किया।
प्रदेश के तत्कालीन मुख्य अभियंता विजय पांढरे ने पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। विजय पांढरे ने कहा कि पिछले ७० वर्षों में कांग्रेस सरकार ने जितना भ्रष्टाचार नहीं किया होगा, उससे कहीं अधिक भ्रष्टाचार भाजपा के लोगों ने केवल १० वर्षों में किया है। अधिकारियों, नेताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत से महाराष्ट्र को बड़े पैमाने पर लूटा जा रहा है।
भ्रष्टाचार को दबा देती है सरकार
विजय पांढरे ने कहा कि सत्ताधारी दल बड़े चोर हैं और केंद्र की सरकार राज्य के भ्रष्टाचार को ढकती रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अजीत पवार के भ्रष्टाचार को फडणवीस और मोदी ने ढक दिया है और अब ये सभी लुटेरे एक-दूसरे के साथ मिलकर बैठे हुए हैं। कई परियोजनाओं के अनुमान बिना किसी सर्वेक्षण या निरीक्षण के तैयार किए गए। निविदाएं स्वीकार करने के बाद सर्वे और डिजाइन बनाए गए, जिससे मनमाने तरीके से लागत बढ़ाई गई। उन्होंने दावा किया कि पुरंदर जैसे सैकड़ों प्रोजेक्ट हैं, जिनमें बड़े घोटाले हुए हैं।
सिंडिकेट बनाकर राज्य को लूटा
विजय पांढरे ने कहा कि कुछ चापलूस अधिकारी मंत्रियों को यह सिखाते हैं कि पैसे वैâसे खाए जाएं, जो अधिकारी उनकी बात नहीं मानते, उन्हें तबादलों की धमकी दी जाती है या उनका करियर खराब कर दिया जाता है। अधिकारियों, नेताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत से महाराष्ट्र को लूटा जा रहा है। चितले समिति ने हाई पावर कमेटी गठित कर जांच की सिफारिश की थी और सरकार ने उसे स्वीकार भी किया था, लेकिन वास्तव में पूरे मामले को दबाने का काम किया गया और फडणवीस ने क्लीन चिट दे दी।
भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति
विजय पांढरे ने कहा कि भले ही अजीत पवार पुरंदर सिंचाई योजना मेंं ११० करोड़ रुपए का आंकड़ा बता रहे हों, लेकिन वास्तव में ऐसा ही मामला कृष्णा घाटी की कई योजनाओं में हुआ है और यह आंकड़ा हजारों करोड़ रुपए का है। अजीत पवार ने भ्रष्टाचार की एक विशाल इमारत खड़ी कर दी। उन्होंने कहा कि कृष्णा घाटी के बाद तापी, नागपुर, मराठवाड़ा और कोकण महामंडलों में भ्रष्टाचार को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का काम भी अजीत पवार ने ही किया, क्योंकि आने वाले कई वर्षों तक उन्हीं का इस विभाग पर नियंत्रण रहा।

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