मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स : खामोशी का सौदा!.. कीमत १.३० लाख डॉलर

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स : खामोशी का सौदा!.. कीमत १.३० लाख डॉलर

श्रीकिशोर शाही

२०१६ आते-आते हालात पूरी तरह बदल चुके थे। डोनाल्ड ट्रंप अब सिर्फ एक कारोबारी या टीवी चेहरा नहीं रहे थे। जून २०१५ में उन्होंने औपचारिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी थी। रिपब्लिकन प्राइमरी में उनकी लोकप्रियता तेजीr से आगे बढ़ रही थी और नवंबर २०१६ का चुनाव सामने था। इसी के साथ, अतीत की कई दबाई गई बातें अचानक अहम हो गर्इं।
चुनाव से ठीक पहले, अक्टूबर २०१६ में, स्टॉर्मी डेनियल्स की कहानी फिर से सामने आने लगी। मीडिया और टैब्लॉयड्स को संकेत मिलने लगे कि २००६ की वह घटना सार्वजनिक हो सकती है। उस समय यह सिर्फ एक निजी आरोप नहीं था, बल्कि एक संभावित चुनावी नुकसान बन चुका था। ट्रंप के करीबी लोगों को डर था कि मतदान से कुछ हफ्ते पहले ऐसा खुलासा वोटरों पर असर डाल सकता है।
इसी माहौल में ट्रंप के निजी वकील माइकल कोहेन सक्रिय हुए। उन्होंने स्टॉर्मी डेनियल्स से संपर्क किया और एक तैयार एनडीए (नन डिस्क्लोजर एग्रीमेंट) तैयार किया गया। समझौते के तहत स्टॉर्मी डेनियल्स को १.३० लाख डॉलर दिए गए, ताकि वे उस संबंध के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ न बोलें। यह भुगतान चुनाव से सिर्फ ११ दिन पहले २७ अक्टूबर २०१६ को किया गया। यह पैसा सीधे ट्रंप के नाम से नहीं गया। माइकल कोहेन ने अपने नियंत्रण वाली एक शेल कंपनी के जरिए यह राशि ट्रांसफर की। एनडीए में दोनों के असली नाम भी दर्ज नहीं किए गए। ट्रंप को डेविड डेनिसन और स्टॉर्मी डेनियल्स को पेगी पीटरसन कहा गया। कागजों पर यह एक निजी गोपनीय समझौता था, लेकिन समय और संदर्भ ने इसे कहीं ज्यादा संवेदनशील बना दिया। चुनाव बीत गया। ट्रंप जीत गए और जनवरी २०१७ में राष्ट्रपति बन गए। कुछ महीनों तक यह सौदा दबा रहा, लेकिन २०१८ में जब माइकल कोहेन की भूमिका जांच के दायरे में आई तो यह भुगतान सार्वजनिक हो गया। कोहेन ने बाद में स्वीकार किया कि यह पैसा ट्रंप के कहने पर दिया गया था और बाद में ट्रंप की कंपनी ने उसे लौटा दिया था।
कंपनी के रिकॉर्ड में यह वापसी ‘कानूनी फीस’ के रूप में दर्ज की गई। यहीं से मामला सिर्फ नैतिक नहीं रहा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह जानबूझकर की गई गलत एंट्री थी, ताकि असली भुगतान और उसका उद्देश्य छुपाया जा सके। जो बात चुनाव से पहले चुप कराने के लिए की गई थी, वही अब कानूनी जांच का केंद्र बन चुकी थी। इस तरह, २००६ की एक निजी घटना, २०१६ के एक चुनावी पैâसले से जुड़कर, अब कानून की भाषा बोलने लगी थी। कहानी अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुकी थी, जहां जांच, आरोप और अदालत शामिल होने वाले थे।

(शेष अगले अंक में)

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