मुख्यपृष्ठनए समाचारवोटिंग से पहले मतदाता का नाम हुआ ‘लापता’!

वोटिंग से पहले मतदाता का नाम हुआ ‘लापता’!

– एक घंटे तक भटकते रहे वन मंत्री गणेश नाईक

– इस बूथ से उस बूथ का लगाते रहे चक्कर

सामना संवाददाता / मुंबई

लोकतंत्र की परीक्षा के दिन चुनाव आयोग खुद कटघरे में खड़ा नजर आया, जब मतदान शुरू होने से पहले ही मतदाता के नाम ही ‘लापता’ हो गए। हालात इतने बिगड़े कि महायुति सरकार के वन मंत्री गणेश नाईक भी बेहाल दिखे। उनका नाम तो था लेकिन मतदाता सूची से गायब रहा। इस चक्कर में उन्हें एक घंटे तक दो मतदान केंद्रों के चक्कर काटने पड़े। आखिरकार सेंट मैरी स्कूल के मतदान केंद्र पर उनका नाम मिला। इसके अलावा चुनाव आयोग की इस लापरवाही से उनका परिवार भी बिखर गया। हालांकि, तब तक सिस्टम पर सवाल खड़े हो चुके थे। मंत्री का तीखा सवाल सीधा और सख्त था कि जब सरकार के एक मंत्री के साथ ऐसा हो सकता है तो आम मतदाता का क्या?
बता दें कि राज्य की २९ महानगरपालिकाओं के लिए कल मतदान की प्रक्रिया पूरी हुई। सुबह ७.३० से शाम ५.३० बजे तक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करते दिखे। मुंबई सहित राज्य के कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इसी बीच मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी एक बार फिर सामने आई है। इस अव्यवस्था का सीधा असर अब राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक और उनके परिवार पर पड़ा है। दो-दो मतदान केंद्रों पर चक्कर लगाने के बावजूद गणेश नाईक का नाम मतदाता सूची में नहीं मिल पाया। इस पूरे मामले पर गणेश नाईक ने चुनाव आयोग पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही इमारत में रहने वाले, एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग स्थानों पर दर्ज हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
रात में बांटे पैसे
गणेश नाईक ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दौरे को चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन बताते हुए सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि रात में शैतान की तरह घूमकर हराम के पैसे बांटे, लेकिन नई मुंबईवासियों ने उसे नकार दिया।
टू द पॉइंट काम नहीं
नाईक का कहना है कि चुनावी मशीनरी टू द पॉइंट काम नहीं कर रही है। गणेश नाईक और उनके परिवार के मतदान में आई यह परेशानी सुबह ७.३० बजे से शुरू हुई थी। यह गड़बड़ी करीब एक घंटे तक चली। अंतत: कोपरखैरणे स्थित सेंट मैरी हाई स्कूल के मतदान केंद्र पर गणेश नाईक, संजीव नाईक और उनकी बहू कल्पना नाईक के नाम मतदाता सूची में पाए गए।
एक परिवार, दो मतदान केंद्र
नाईक के भतीजे और पूर्व महापौर सागर नाईक व उनकी पत्नी के नाम परिवार के साथ नहीं, बल्कि अलग मतदान केंद्र पर दर्ज पाए गए। इसके चलते जो नाईक परिवार हर चुनाव में एक ही मतदान केंद्र पर वोट डालता रहा है, उसे इस बार चुनाव आयोग की अव्यवस्था के कारण अलग-अलग स्थानों पर मतदान करना पड़ा।

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