मुख्यपृष्ठनए समाचारमीरा-भायंदर मनपा चुनाव २०२६... लोकतंत्र की हत्या का प्रयास

मीरा-भायंदर मनपा चुनाव २०२६… लोकतंत्र की हत्या का प्रयास

-वोटरों के उत्साह पर चुनाव आयोग की नाकामी ने फेरा पानी!

-कहीं सूची से नाम गुल, कहीं वार्ड बदली तो कहीं फर्जी मतदान और स्याही निकली

-भाजपा उम्मीदवारों के नेम-प्लेट पहनकर ड्यूटी करते दिखे पोलिंग एजेंट

सुरेश गोलानी / मुंबई

मीरा-भायंदर महानगरपालिका के ९५ नगरसेवकों को चुनने के लिए गुरुवार सुबह ७:३० बजे से शाम ५:३० बजे के बीच हुआ मतदान भारी पुलिस सुरक्षा और उससे भी अधिक भारी चुनाव आयोग की गड़बड़ियों तथा कुप्रबंधन के बीच संपन्न हुआ। तीन वर्षों से ज्यादा समय की प्रतीक्षा के बाद नगरसेवक चुनने का मौका मिलने के बाद वोटर उत्साही थे, लेकिन चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में की गई गड़बड़ियों, कुप्रबंधन और पक्षपाती रवैये ने इस उत्साह पर पानी फेरने का काम किया है।
सरकार में एक साथ मिलकर मलाई खा रहे भाजपा और शिंदे गुट मनपा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े और सत्ता हथियाने के लिए उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद जैसे हर हथकंडे को अपनाया। आंकड़ों के मुताबिक सुबह ७:३० से दोपहर १:३० के बीच २८.१० प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो अगले दो घंटे के बाद (३:३० बजे तक) ३८.३४ तक पहुंचा, जिसमें कुल ३,१४,०३३ मतदाताओं (१,७०,०२२ पुरुष और १,४४,०११ महिला) ने अपने मतों का प्रयोग किया।
ज्ञात हो कि इस चुनाव में फाइनल सूची के अनुसार मतदाताओं की कुल संख्या ८,१८,१५१ जिसमें ४,३३,०५३ पुरुष ३,८६,७०८ महिला और २० अन्य का समावेश था। मतदाता सूची में पाई गई गंभीर गड़बड़ियों के खिलाफ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और मनसे जैसे विपक्षी दलों ने जिसका जोरदार विरोध किया। आरोप है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत कई वार्डों में हजारों नाम एक साथ गायब थे, जबकि कुछ स्थानों पर दूसरे वार्डों की पूरी सूची को स्थानांतरित कर दिया गया था। कहीं मतदाता सूची से नाम गायब होने, वार्ड बदली होने तो कहीं फर्जी मतदान और कुछ ही मिनटों में उंगली पर लगी स्याही निकल जाने की शिकायतों के अलावा एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर बिखरे होने के भी कई मामले सामने आए। मीरा रोड के कुछ मतदान केंद्रों में तो पोलिंग एजेंट भाजपा उम्मीदवारों के नेम-प्लेट पहनकर ड्यूटी करते दिखे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुआ। वोटर दर-दर भटकते रहे और चुनाव आयोग के अधिकारी अपना हाथ बांधे मूकदर्शक बने बैठे रहे।

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