मुख्यपृष्ठसमाचारएजुकेशन अब खर्च नहीं, भविष्य में इंवेस्टमेंट बन चुका है-गौतम राजगढ़िया

एजुकेशन अब खर्च नहीं, भविष्य में इंवेस्टमेंट बन चुका है-गौतम राजगढ़िया

-अभिभावक स्कूलों में ROI को नई नजर से देखने लगे हैं

सामना संवाददाता / मुंबई

“एजुकेशन गरीबी और अज्ञानता के खिलाफ लड़ाई में सबसे ताकतवर हथियार है।” इस विचार को आज के दौर में एक नया अर्थ मिल रहा है। दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) वाराणसी, नासिक, लावा नागपुर और हिंजेवाड़ी पुणे के प्रो वाइस चेयरमैन गौतम राजगढ़िया का कहना है कि अब माता-पिता शिक्षा को सिर्फ़ एक सेवा या जरूरत नहीं, बल्कि अपने बच्चे के भविष्य, चरित्र और संभावनाओं में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखने लगे हैं।
राजगढ़िया बताते हैं कि वर्षों में हजारों अभिभावकों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह स्पष्ट बदलाव महसूस किया है। आज माता-पिता स्कूलों से केवल किताबों, शेड्यूल या सुविधाओं की जानकारी नहीं चाहते, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि उनका बच्चा कितना आत्मविश्वासी बनेगा, क्या वह सोचने और निर्णय लेने में सक्षम होगा और क्या वह तेजी से बदलती दुनिया के लिए तैयार होगा।
उनके अनुसार, आज माता-पिता शिक्षा में “रिटर्न ऑन इंवेस्टमेंट (ROI)” को अंकों या तिमाही परिणामों में नहीं, बल्कि वर्षों बाद उभरने वाले गुणों-जैसे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, मूल्यबोध और जिम्मेदारी की भावना-में देखते हैं।
वे कहते हैं, “जब बच्चे अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारी खुद लेने लगते हैं, अपने विचार आत्मविश्वास से रखते हैं और चर्चा का नेतृत्व करते हैं, तब माता-पिता को असली रिटर्न दिखाई देता है।”
डिजिटल लिटरेसी, कोडिंग और प्रॉब्लम-सॉल्विंग जैसे विषयों पर स्कूलों का बढ़ता फोकस भी इसी बदलाव का उदाहरण है। शुरुआत में कुछ माता-पिता संदेह करते हैं, लेकिन जल्द ही वे देखते हैं कि बच्चे केवल टूल्स नहीं सीख रहे, बल्कि नई तरह से सोचना, समाधान डिजाइन करना और दूसरों का मार्गदर्शन करना भी सीख रहे हैं। यही अनुकूलनशीलता और नवाचार आज की दुनिया की सबसे बड़ी पूंजी बन रहे हैं।
राजगढ़िया मानते हैं कि शिक्षा का ROI केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। स्कूलों द्वारा बच्चों को पहचान, अपनापन और प्रोत्साहन देने से उनमें भावनात्मक मजबूती आती है। यह स्कूल और परिवार के बीच भरोसे को भी गहरा करता है।
उनका कहना है कि आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक मूल्यों का संतुलन ही असली ताकत है। जो स्कूल विज्ञान, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ बच्चों में संवेदनशीलता, सामाजिक जिम्मेदारी और संस्कार विकसित करते हैं, वही उन्हें सच्चे अर्थों में तैयार करते हैं।
एक अभिभावक का अनुभव साझा करते हुए वे बताते हैं, “एक कम्युनिटी सर्विस प्रोजेक्ट के बाद उनके बेटे ने समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यही असली रिटर्न है, मेरे बेटे को जीवन का मकसद मिल गया।”
राजगढ़िया के अनुसार, शिक्षा ही ऐसा निवेश है जो जीवन भर बढ़ता रहता है। हर सीखी गई स्किल, हर अपनाया गया मूल्य और हर चुनौती बच्चे के भीतर एक मजबूत पूंजी बनती जाती है। वर्षों बाद यही पूंजी जिम्मेदार नागरिक, लीडर और इनोवेटर तैयार करती है।
वे कहते हैं, “पेरेंट्स हमें अपना सबसे कीमती निवेश सौंपते हैं-उनके बच्चे। हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसा माहौल बनाएं, जहां जिज्ञासा बढ़े, गलतियों को सीखने का मौका मिले और हर बच्चा खुद को मजबूत महसूस करे।”
अंत में वे स्पष्ट करते हैं कि पढ़ाई कभी खर्च नहीं होती। यह सबसे टिकाऊ निवेश है, जिसका असली लाभ अंकों में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और उद्देश्य में दिखाई देता है। यही शिक्षा बच्चों को समाज में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।

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