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माघ अमावस्या यानी मौनी अमावस्या

 शीतल अवस्थी

माघ मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या मौनी अमावस्या के रूप में प्रसिद्ध है। इस दिन देवताओं को भी दुर्लभ हो ऐसा पुण्यकाल होता है, क्योंकि गंगा, पुष्कर एवं दिव्य अंतरिक्ष और भूमि के जो सब तीर्थ हैं, ये अमावस्या के दिन जप, ध्यान, पूजन करने पर विशेष धर्मलाभ प्रदान करते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवतागण किसी कारणवश भगवान शिव के पास पहुंचे। तब महादेव के साथ कार्तिकेय और गणेशजी भी बैठे थे। किसी बात पर तब भगवान शिव ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करेगा वह श्रेष्ठ कहलाएगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। गणेशजी सोचने लगे चूहे पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने में बहुत समय लग जाएगा। गणेश अपने स्थान से उठे और माता-पिता की तीन बार परिक्रमा करके बैठ गए। शिवजी ने गणेश से पृथ्वी की परिक्रमा न करने का कारण पूछा। तब गणेश ने कहा ‘माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।’ यह सुनकर शिवजी ने गणेश को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप दूर होंगे। इस व्रत को करने से व्रतधारी के सभी तरह के दुख दूर होंगे और सुख-समृद्धि बढ़ेगी।

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