फिरोज खान / मुंबई
धारावी के झुग्गी-झोपड़ी में रहनेवालों के लिए महानगरपालिका चुनाव काफी अहम था। बड़ी संख्या में लोगों को बड़े रिडेवलपमेंट प्लान के तहत मुंबई के बाहरी इलाकों में शिफ्ट किया जा रहा है। इससे नाराज मतदाताओं ने युति सरकार को ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया कि धारावी से बीजेपी का सुपड़ा ही साफ हो गया।
बड़ी झुग्गी बस्ती के सात चुनावी वार्ड में से चार शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवार, दो कांग्रेस और एक शिंदे गुट ने जीता है। यहां बीजेपी एक भी सीट नहीं निकाल पाई। इसकी खास वजह जबरदस्ती थोपा जा रहा रिडेवलपमेंट प्लान है। धारावी के लोगों ने एकजुट होकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उम्मीदवारों को मतदान किया। नतीजा यह हुआ कि सात में से ४ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को सीटें मिलीं और २ कांग्रेस को। बीजेपी ने चार और शिंदे गुट ने तीन उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। अपने जबरदस्त कैंपेन और सारी ताकत झोंक देने के बावजूद बीजेपी अपना खाता भी नहीं खोल पाई। शिंदे गुट को मात्र एक सीट में ही संतोष करना पड़ा। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के जीतने वाले उम्मीदवार टीएम जगदीश, अर्चना शिंदे, जोसेफ कोली और हर्षला मोरे हैं, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार आशा काले और साजिदा बब्बू खान ने जीत हासिल की।
ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, लगभग १,३८,०९९ वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया। यहां के लोगों का कहना है कि चुनाव का फैसला रिडेवलपमेंट प्लान का जवाब है। यह धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के मौजूदा रूप के खिलाफ एक निर्णायक फैसला है। धारावी के लोगों का कहना है कि वे डेवलपमेंट के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि जबरदस्ती के डेवलपमेंट के खिलाफ हैं। लोग एक ऐसा रिडेवलपमेंट प्रोसेस चाहते हैं, जिसमें धारावी का हर रहनेवाला धारावी के अंदर ही बस जाए। धारावी के कुंभारवाड़ा के रहनेवालों का कहना कि वे थोपे गए रिडेवलपमेंट प्लान से नाखुश थे।
