-टाटा मुंबई मैराथन में ४०० लोगों की खुली चुनौती
-डॉक्टर-मरीजों का हर कदम कलंक के मुंह पर तमाचा
सामना संवाददाता / मुंबई
टाटा मुंबई मैराथन २०२६ सिर्फ रफ्तार और रिकॉर्ड की दौड़ नहीं रही, बल्कि यह मिर्गी से जुड़े सामाजिक कलंक के खिलाफ एक खुला विद्रोह बनकर उभरी। साथ ही मुंबई की सड़कों से देश को खुली ललकार दी गई कि मिर्गी कमजोरी नहीं है। बीमारी से ज्यादा खतरनाक वह सोच है, जो मिर्गी से पीड़ितों को हाशिए पर धकेलती रही है। इसी सोच के खिलाफ ४०० लोगों की खुली चुनौती कल शहर की सड़कों पर उतरी। यह सिर्फ दौड़ नहीं थी, बल्कि भेदभाव पर सीधा हमला था। ड्रीम रन से फुल मैराथन तक हर कदम समाज के उस कलंक के मुंह पर तमाचा था, जिसने वर्षों तक मिर्गी को डर और शर्म से जोड़े रखा। डॉक्टर और मरीज कंधे से कंधा मिलाकर दौड़े, ताकि संदेश साफ रहे कि यह लड़ाई इलाज से पहले बराबरी की है।
एपिलेप्सी फाउंडेशन इंडिया ने मैराथन में दमदार मौजूदगी दर्ज की। फाउंडेशन के माध्यम से दौड़ में शामिल मरीज और डॉक्टर और केयरगिवर एक साथ नजर आए और उन्होंने साफ कहा कि मिर्गी कोई कमजोरी नहीं, बल्कि असली रोग है समाज की संकीर्ण सोच है। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. निर्मल सूर्या ने कहा कि पिछले १५ वर्षों से लगातार एपिलेप्सी फाउंडेशन इंडिया इस मंच का उपयोग जागरूकता के लिए कर रहा है। इस बार ४०० से अधिक प्रतिभागियों ने सड़कों पर उतरकर मिर्गी से जुड़े डर, भेदभाव और अज्ञानता को सीधी चुनौती दी।
देश में १.४ करोड़ लोग मिर्गी से प्रभावित
डॉ. सूर्या ने कहा कि हिंदुस्थान में लगभग १.४ करोड़ लोग मिर्गी से प्रभावित हैं, लेकिन आज भी यह बीमारी सामाजिक कलंक से घिरी हुई है। इसी चुप्पी को तोड़ने के लिए यह हुंकार बुलंद हुई। ईएफआई के प्रतिभागियों ने मैराथन की हर श्रेणी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसमें ड्रीम रन में ३३० धावक, १० किलोमीटर दौड़ में १३ धावक, फुल मैराथन में १ धावक और हाफ मैराथन में ४ धावकों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा ५० से अधिक समर्थक सड़कों पर मौजूद रहे, जिन्होंने धावकों का हौसला बढ़ाया। डॉ सूर्या ने कहा कि इस दौड़ की सबसे बड़ी ताकत यह रही कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति, डॉक्टर, न्यूरोलॉजिस्ट, थेरेपिस्ट, मेडिकल प्रोफेशनल्स और केयरगिवर एक साथ नजर आए। यह दृश्य अपने आप में एक सख्त संदेश था कि मिर्गी से लड़ाई अकेले की नहीं, समाज के साथ मिलकर लड़ी जाने वाली लड़ाई है।
बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
टाटा मुंबई मैराथन में आम सड़क बंद होने के कारण सीएसएमटी के पास बुजुर्ग यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर दक्षिण मुंबई के कुछ हिस्सों, विशेष रूप से सीएसएमटी पर यातायात में भारी अराजकता पैदा कर दी। मैराथन में बुजुर्ग यात्रियों सहित आम नागरिकों को २००-४०० मीटर पैदल चलना पड़ा और टैक्सियों के लिए २० मिनट तक इंतजार करना पड़ा, जिससे योजना और जमीनी स्तर पर दिए गए मार्गदर्शन पर सवाल उठने लगे।
‘वंदे मातरम’ के १५० वर्ष पर रेल सुरक्षा का सशक्त संदेश
मुंबई की सड़कों पर रविवार को जब टाटा मुंबई मैराथन २०२६ की धड़कन गूंज रही थी, तब इस जोश में पश्चिम रेलवे भी पूरे दमखम के साथ शामिल नजर आया। ‘वंदे मातरम’ के १५० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पश्चिम रेलवे के १५० अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने न सिर्फ दौड़ लगाई, बल्कि फिटनेस, रेल सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिक कर्तव्यों का प्रभावशाली संदेश भी दिया। पश्चिम रेलवे की इस टीम का नेतृत्व महाप्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता ने किया। उनके साथ कई वरिष्ठ रेल अधिकारी भी मैराथन में उतरे, जिनमें स्टेशन मास्टर, टिकट जांच कर्मचारी, ट्रेन प्रबंधक, कोचिंग डिपो स्टाफ और ट्रैकमैन जैसे प्रâंटलाइन कर्मचारी भी शामिल थे।
