मुख्यपृष्ठस्तंभफोकस : कागजों में सिमटी यातायात व्यवस्था

फोकस : कागजों में सिमटी यातायात व्यवस्था

सगीर अंसारी
गोवंडी क्षेत्र में मुंबई यातायात पुलिस के नियम केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं। यहां न तो सिग्नल का डर है, न जुर्माने की चिंता और न ही प्रशासन की सख्ती। नतीजा यह है कि आम नागरिक रोजाना ट्रैफिक जाम, दुर्घटना के खतरे और अव्यवस्था के बीच जीने को मजबूर है।
गोवंडी क्षेत्र में यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रिक्शा, मोटरसाइकिल और कार चालक सड़कों पर अपनी मनमर्जी से वाहन चलाते नजर आते हैं। शिवाजी नगर, बैगनवाड़ी, म्हाडा कॉलोनी, रफीक नगर और रोड नंबर ३ (हरी मस्जिद) से गुजरने वाले शेयरिंग रिक्शाचालक इस अव्यवस्था के सबसे बड़े उदाहरण बन चुके हैं।
इन इलाकों में शेयरिंग रिक्शा चालक कहीं भी, कभी भी सवारी बैठाने और उतारने के लिए बीच सड़क पर रिक्शा खड़ा कर देते हैं। इससे कुछ ही मिनटों में लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब एंबुलेंस और स्कूल बसों तक को निकलने में परेशानी होती है।
स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में ऐसे रिक्शाचालक सड़क पर दौड़ रहे हैं, जिनके पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस है, न बैज और न ही रिक्शा के जरूरी कागजात। कागजातों के अभाव में इन चालकों को न चालान का डर है और न ही कार्रवाई का। यही वजह है कि ये चालक पांच-पांच सवारी बैठाकर तेज रफ्तार से रिक्शा दौड़ाते हैं, जिससे हर वक्त दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रैफिक सिग्नल पर भी इन चालकों को यातायात पुलिस का कोई भय नहीं दिखता। कई बार पुलिस की मौजूदगी में ही लाल सिग्नल तोड़ते हुए रिक्शा और अन्य वाहन फर्राटे से निकल जाते हैं। इससे न सिर्फ दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है, बल्कि पूरे इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है।
गोवंडी क्षेत्र में गैरकानूनी पार्विंâग भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। हाईवे रोड से लेकर अंदरूनी संकरी गलियों तक अवैध पार्विंâग का साम्राज्य पैâला हुआ है। सड़कों के किनारे खड़े वाहन राहगीरों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने और अखबारों में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद मानखुर्द यातायात पुलिस और उच्च अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ता। लोगों का कहना है कि आखिर कब सरकार और यातायात विभाग का फोकस गोवंडी के आम नागरिकों की इस गंभीर समस्या की ओर जाएगा। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है या फिर समय रहते सख्त कार्रवाई कर गोवंडी की सड़कों को सुरक्षित और सुगम बनाया जाएगा। जनता की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

 

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