एम एम एस
भाई, वैसे तो फलों की दुनिया में आम को ‘राजा’ माना जाता है, लेकिन बनारस का यह ‘लंगड़ा’ आम तो खुद में एक पूरी किंवदंती है। लोग अक्सर कहते हैं कि ‘नाम में क्या रखा है?’ पर इस आम के मामले में तो नाम ही इसकी सबसे बड़ी यूएसपी है।
तो चलिए, बनारस की गलियों से निकले इस नवाब के बारे में थोड़े मजेदार अंदाज में बात करते हैं…
जब आम के ‘पैर’ नहीं, पर नाम ‘लंगड़ा’ पड़ गया
सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि भाई, फल भी कहीं लंगड़ा होता है क्या? पर इसके पीछे की कहानी किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
साधु बाबा का कमाल, कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले बनारस के एक मंदिर में एक साधु रहते थे, जो पैरों से थोड़े दिव्यांग थे। उन्होंने अपने आंगन में आम के दो पौधे लगाए। जब फल आए और लोगों ने चखा तो स्वाद ऐसा कि होश उड़ जाएं! अब लोग उस आम को मांगें वैâसे? तो सब कहने लगे, ‘वही लंगड़े साधु वाला आम दे दो।’ धीरे-धीरे साधु महाराज तो ओझल हो गए, पर उनका लगाया आम ‘लंगड़ा’ के नाम से अमर हो गया। मतलब, बिना चले ही इस आम ने पूरी दुनिया की सैर कर ली!
गिरगिट सा रंग, पर दिल सोने का!
लंगड़ा आम आपको धोखा देने में उस्ताद है। इसे ‘आम दुनिया’ का मिस्टर इंडिया कह सकते हैं। कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है भाई! यह आम पकने के बाद भी बाहर से एकदम हरा-कचहरा दिखता है। नया बंदा इसे देखकर सोचेगा, ‘अरे, ये तो अभी कच्चा है, चटनी बना लेते हैं।’ लेकिन जैसे ही चाकू चलेगा, अंदर से निकलेगा एकदम केसरिया, रसीला और बिना रेशे वाला गूदा। इसे कहते हैं सरप्राइज!
इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ये है कि इसमें रेशे नहीं होते यानी खाते वक्त दांतों में फंसने की कोई टेंशन नहीं, बस मक्खन की तरह पिघल जाता है।
यह सिर्फ फल नहीं, बनारस का ‘प्राइड’ है। जैसे बनारसी साड़ी मशहूर है, वैसे ही यह आम भी वहां की मिट्टी की खुशबू समेटे हुए है।
स्वाद के अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वह यह है कि इसे आधिकारिक तौर पर ‘बनारसी लंगड़ा’ के रूप में जीआई टैग मिल चुका है यानी अब इसकी नकल करना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।
बिहार और बंगाल भी इसके दीवाने हैं। भागलपुर वाले तो इसे दुधिया लंगड़ा’ कहते हैं, क्योंकि इसमें से दूध जैसी सोंधी महक आती है। अब तो सात समंदर पार भी लोग इसके दीवाने हो रहे हैं। जून-जुलाई के महीने में अगर बनारस जाकर लंगड़ा नहीं खाया, तो समझिए आपकी जिंदगी… सॉरी जिंदगी नहीं गर्मी बेकार गई!
अगर कोई आपको हरा आम दिखाकर कहे कि ये बहुत मीठा है, तो उस पर शक मत करना… हो सकता है वो ‘लंगड़ा’ ही हो!
