कैग रिपोर्ट का खुलासा
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
राज्य के राजस्व तंत्र की रीढ़ माने जाने वाले विभागों में व्यापक अनियमितताओं ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। वैâग की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्टांप शुल्क से लेकर जीएसटी तक टैक्स सिस्टम में कई स्तरों पर सेंध लगी हुई है। गलत वर्गीकरण, संपत्तियों का कम मूल्यांकन, फर्जी ई-वे बिल और कमजोर निगरानी के कारण सरकार को हजारों करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। ऑडिट में यह भी सामने आया कि कर वसूली की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक ढिलाई के चलते न केवल देनदारियां अधूरी रहीं, बल्कि कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण भी नहीं हो सका। रिपोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वैâग रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त, मुद्रांक व पंजीयन और गृह (उत्पादन शुल्क) विभागों में अनुपालन की स्थिति संतोषजनक नहीं रही। वर्ष २०२२-२३ के दौरान २१७ यूनिट की जांच में सामने आया कि दस्तावेजों के गलत वर्गीकरण से १०.५० करोड़ रुपए की राजस्व हानि हुई, जबकि मुंबई में एक संपत्ति के कम मूल्यांकन से १.८९ करोड़ रुपए की वसूली नहीं हो सकी। अनियमित छूट देने, भूमि के पूर्ण क्षेत्रफल को नजरअंदाज करने और लीज अवधि का गलत निर्धारण करने जैसे मामलों में भी लाखों-करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में भी कर वसूली प्रभावित हुई।
जीएसटी के तहत चोरी रोकने का अहम उपकरण मानी जाने वाली ई-वे बिल प्रणाली में भी गंभीर खामियां सामने आईं। ५१ करदाताओं की जांच में ४३ का पंजीयन रद्द किया गया, लेकिन कई मामलों में टैक्स और ब्याज की वसूली ही नहीं की गई, जिससे ९६.८५ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ‘शून्य’ रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं द्वारा वास्तविक आपूर्ति किए जाने के मामले भी सामने आए, जिनमें ३.५३ करोड़ रुपए का कर देय था।
वहीं, रिटर्न दाखिल किए बिना ई-वे बिल जारी करने और माल की वास्तविक आवाजाही न होने जैसे मामलों ने सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऑडिट में यह भी पाया गया कि जांच तंत्र पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है। ई-वे बिल की जांच के लिए समर्पित संसाधनों की कमी, वाहनों का अभाव और डेटा विश्लेषण का सीमित उपयोग कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं।
जीएसटी रिटर्न और भुगतान की निगरानी में खामियां
जीएसटी रिटर्न और भुगतान की निगरानी में भी गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि १० कार्यालयों में रिटर्न की जांच नहीं की गई। पंजीयन रद्द करने में भारी देरी हुई और कई मामलों में रिटर्न दाखिल ही नहीं किए गए। ३६२ करदाताओं के विश्लेषण में आईटीसी १,०५५.४३ करोड़ रुपए और टर्नओवर २,७९३.६२ करोड़ रुपए से जुड़ी बड़ी विसंगतियां सामने आईं। विस्तृत जांच में २० मामलों में १५४.६४ करोड़ रुपए की अनियमितता और ११९ मामलों में ६,६६६.१० करोड़ रुपए की वित्तीय विसंगतियां उजागर हुईं।
तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए
रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कई करदाताओं ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिससे जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई और कर अनुपालन पर गंभीर संदेह पैदा हुआ। कुल मिलाकर, विभाग द्वारा अपनाई गई निगरानी और नियंत्रण प्रणाली प्रभावी नहीं पाई गई, जिससे राजस्व हितों को नुकसान पहुंचा। वैâग ने स्पष्ट सिफारिश की है कि शासन तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए।
