सामना संवाददाता / मुंबई
एक तरफ मुंबई पर भीषण गर्मी का खतरा मंडरा रहा है, दूसरी तरफ शहर के हरित आवरण पर सरकार की योजनाओं से बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे कॉरिडोर के किनारे ७०० से अधिक पेड़ों की कटाई और प्रत्यारोपण करने की तैयारी दर्शाई है। जिसे लेकर पर्यावरणविदों और नागरिक संगठनों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे मुंबई के लिए गंभीर पारिस्थितिक झटका बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि जब शहर पहले से गर्मी, प्रदूषण और घटते खुले मैदानों से जूझ रहा है, तब पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाना जनता के भविष्य से खिलवाड़ है।
एडवांस्ड लोवैâलिटी मैनेजमेंट ग्रुप (पवई) की अध्यक्ष पामेला चीमा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई की महापौर रितु तावड़े को संयुक्त अपील भेजकर इस प्रस्ताव को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मुंबई आज एक खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां लगातार बढ़ता तापमान, घटती हरियाली और बिगड़ती वायु गुणवत्ता शहर के जीवन को असुरक्षित बना रहे हैं।
पर्यावरणविदों का आरोप है कि सरकार विकास परियोजनाओं के नाम पर लगातार शहर की हरियाली कम कर रही है। सड़कें, कॉरिडोर और कंक्रीट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि पेड़ों और पर्यावरण को नजरअंदाज किया जा रहा है।
जलवायु सुरक्षा पर हमला
पेड़ों को हटाने की यह योजना मुंबई की जलवायु सुरक्षा पर सीधा हमला है। आज जो पेड़ काटे जाएंगे, वही कल की हीटवेव को और भयानक बनाएंगे।
कंक्रीट का जंगल नहीं चाहिए
कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि मुंबई को आज ज्यादा छाया, ज्यादा ऑक्सीजन और ज्यादा हरित क्षेत्र चाहिए, न कि पेड़ों को हटाकर कंक्रीट का विस्तार।
