– बीएमसी की लापरवाही से सड़कें बेहाल
– मरम्मत के बावजूद गड्ढों से नहीं मिली निजात
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में हर साल मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत के नाम पर भारी-भरकम बजट खर्च किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद गड्ढों की समस्या जस की तस बनी हुई है। इस बार बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे की मरम्मत के लिए १६४.९४ करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर अब सवाल उठने लगे हैं।
मुंबईकरों का कहना है कि हर वर्ष करोड़ों रुपये सड़क मरम्मत पर खर्च होने के बावजूद बारिश शुरू होते ही सड़कें फिर से गड्ढों में बदल जाती हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीएमसी द्वारा माइक्रो-सर्फेसिंग तकनीक के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, लेकिन इससे पहले भी कई तकनीकों का प्रयोग किया गया है, जिनका असर लंबे समय तक नहीं रहा। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह तकनीक भारी बारिश और ट्रैफिक के दबाव को सहन कर पाएगी।
योजना के तहत कुर्ला, घाटकोपर, विक्रोली और जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काम किए जाने का दावा है, लेकिन स्थानीय नागरिक अब भी खराब सड़कों और अधूरे कार्यों की शिकायत कर रहे हैं। ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के लिए ७७.१४ करोड़ रुपये और वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के लिए ८७.८० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इतने बड़े बजट के बावजूद हर साल हालात नहीं बदलने से जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। यह प्रस्ताव अभी स्थायी समिति की मंजूरी के लिए लंबित है, लेकिन उससे पहले ही इसकी पारदर्शिता और प्रभावशीलता को लेकर बहस तेज हो गई है। मुंबईकरों की मांग है कि इस बार केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर टिकाऊ काम दिखना चाहिए।
