-जेवीएलआर पर मेट्रो कार्य में मजदूर और राहगीरों की जान को खतरा
द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई में मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं के बावजूद एमएमआरडीए की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड (जेवीएलआर) पर चल रहे मेट्रो-६ प्रोजेक्ट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण श्रमिकों और राहगीरों की जान जोखिम में पड़ गई है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि कार्यस्थल पर मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना लगातार बनी हुई है। जेवीएलआर, जो शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, वहां दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में बिना मानक सुरक्षा के चल रहा निर्माण कार्य यात्रियों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
हालांकि बैरिकेड लगाए गए हैं, लेकिन वे व्यवस्थित तरीके से नहीं लगाए गए हैं। मेट्रो पिलर पर काम के दौरान सुरक्षा जाल (ग्रीन नेट) की भी कमी देखी जा रही है। यदि काम के दौरान कोई भारी उपकरण नीचे गिरता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है।
इसके अलावा, निर्माण सामग्री और भारी मशीनरी की गलत पार्विंâग के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, जिससे यातायात जाम और दुर्घटना की स्थिति बन रही है, खासकर रात के समय। मुंबई मेट्रो निर्माण कार्य में इससे पहले भी कई गंभीर हादसे सामने आ चुके हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ है। इसके बावजूद एमएमआरडीए की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि हादसों के बाद केवल मुआवजा दिया जाता है, लेकिन ठेकेदारों या जिम्मेदार एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती।
अप्रैल २०२६ में बीकेसी में मेट्रो लाइन २बी के निर्माण के दौरान एक भारी प्रीकास्ट बीम पिलर पर चढ़ाते समय असंतुलित होकर गिर गया था। इसी महीने मेट्रो लाइन ४ के निर्माण के दौरान एलबीएस रोड पर एक बड़ा लकड़ी का तख्ता सड़क पर गिरा और एक कार को नुकसान पहुंचा। फरवरी २०२६ में मुलुंड (पश्चिम) में एलबीएस रोड मेट्रो पिलर से सीमेंट का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इन लगातार घटनाओं ने मेट्रो निर्माण की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
