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एआई ने बताया कब मारना है…और उसने गोली मार दी!

– फ्लोरिडा गोलीकांड की चपेट में चैटजीपीटी

-हत्या से पहले छात्र ने पूछे थे हजारों सवाल

– कंपनी की जवाबदेही तय करने की तैयारी

सामना संवाददाता / मुंबई

अमेरिका के फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए गोलीकांड ने एआई और सार्वजनिक सुरक्षा के टकराव को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। इस मामले में एक छात्र पर आरोप है कि उसने हमले से पहले चैटबॉट का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसे एआई ने बताया कि कब और कहां गोली मारनी है। अब अभियोजन पक्ष यह जांच कर रहा है कि इस तकनीक को बनाने वाली कंपनी ओपनएआई को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है या नहीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, २० वर्षीय छात्र फीनिक्स इकनर ने गत वर्ष अप्रैल में तल्लाहैसी शहर में हमला करने से पहले कई महीनों तक चैटबॉट के साथ हजारों संदेशों का आदान-प्रदान किया। उस पर आरोप है कि उसने हथियारों के इस्तेमाल, गोली चलाने के तरीके और छात्र संघ भवन में सबसे अधिक भीड़ कब रहती है, जैसे सवाल पूछे।
मशहूर होने के लिए कितने लोगों की हत्या करूं?
अमेरिका में एक आरोपी ने एआई से पूछकर गोलीबारी की थी। उस घटना में २ लोगों की मौत हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ने चैटबॉट से यह भी पूछा कि मशहूर होने और घटना को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने के लिए कितने लोगों की हत्या करनी होगी? इस पर चैटबॉट ने जवाब दिया कि आम तौर पर तीन या उससे अधिक लोगों की मौत होने पर राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित होता है। इसके अलावा आरोपी ने अधिकतम सुरक्षा वाली जेल और ऐसी घटना पर देश की प्रतिक्रिया जैसे सवाल भी पूछे थे।
इस हमले में दो लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए। छात्र संघ के पास हुए इस हमले के बाद आरोपी पर प्रथम श्रेणी हत्या और हत्या के प्रयास के कई आरोप लगाए गए हैं। उसका मुकदमा १९ अक्टूबर से शुरू होने वाला है। गत माह जेम्स उथमायर ने कंपनी और उसके चैटबॉट की भूमिका की आपराधिक जांच शुरू करने की घोषणा की। अभियोजन पक्ष का कहना है कि चैटबॉट ने आरोपी को हथियार, गोला-बारूद, स्थान और समय के बारे में ऐसी जानकारी दी, जिससे ज्यादा नुकसान हो सकता था। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चैटबॉट ने हिंसा के लिए उकसाया नहीं, बल्कि केवल वही जानकारी दी जो पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। कंपनी का यह भी कहना है कि उसने घटना के बाद खुद ही संबंधित खाते और बातचीत का ब्यौरा जांच एजेंसियों को सौंप दिया।
आखिर कौन है जिम्मेदार?
यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए पूरी दुनिया में एआई के इस्तेमाल, निगरानी और नियमों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि तकनीक ने सिर्फ जवाब देने से आगे बढ़कर कोई भूमिका निभाई तो इससे वैश्विक स्तर पर ऐसे सिस्टम के संचालन के तरीके बदल सकते हैं। वहीं, अगर ऐसा साबित नहीं होता, तब भी यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब आधुनिक तकनीक हिंसक योजनाओं का हिस्सा बन जाए, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी।
आरोपी ने खुद को बताया अवसादग्रस्त
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने बातचीत के दौरान खुद को अवसादग्रस्त, आत्मघाती और सामाजिक रूप से अलग-थलग बताया था। उसने अपने असफल रिश्ते और निजी परेशानियों का भी जिक्र किया था, लेकिन इन संकेतों के बावजूद किसी प्रकार की चेतावनी संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंची। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या एआई कंपनियों को संभावित खतरे की पहचान कर समय रहते रिपोर्ट करना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

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