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३०० टन पार्सल की सुरक्षा के लिए आरपीएफ का सिर्फ एक जवान!

-रामभरोसे कुर्ला टर्मिनस का पार्सल…निजी ठेकेदार की कामचोरी

जेदवी / मुंबई

लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) स्थित पार्सल घर की स्थिति काफी गंभीर है। वहां रोजाना देश के विभिन्न भागों से करीब ३०० टन पार्सलों की आवाजाही होती है। मगर उनकी सुरक्षा के लिए सिर्फ एक आरपीएफ का जवान तैनात है। ऐसे में वहां सामान की सुरक्षा रामभरोसे ही है।
बता दें कि पार्सल विभाग में करीब ५० कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि काम का दायरा इससे कहीं अधिक है। जहां पार्सलों को रखा जाता है, वहां न तो मजबूत बाउंड्री वॉल है और न ही पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था। ऐसे में हजारों टन सामान खुले में पड़ा रहता है, जिससे चोरी और नुकसान की आशंका लगातार बनी रहती है। पूरे पार्सल विभाग में केवल ८ से १० सीसीटीवी वैâमरे लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों को भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इनमें से कितने वैâमरे चालू हैं और कितने बंद पड़े हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। रात्रि के समय स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। केवल एक या दो कर्मचारियों के भरोसे पूरे पार्सल परिसर की निगरानी की जाती है, जिससे सुरक्षा लगभग नाममात्र रह जाती है। जानकारों का मानना है कि मुख्य द्वार पर आधुनिक स्वैâनिंग उपकरण लगाए जाने चाहिए, ताकि संदिग्ध सामान की जांच हो सके। बताया जाता है कि निजी ठेकेदार की कामचोरी के कारण स्थिति बदतर हो गई है।
‘रैंडम चेकिंग’ के भरोसे सुरक्षा
वरिष्ठ वाणिज्यिक क्लर्क चेतन राठौड़ ने खुलासा किया कि पार्सलों की जांच के लिए लगाई गई स्वैâनिंग मशीन का कॉन्ट्रैक्ट तीन साल के लिए था, लेकिन इसे महज एक साल में ही खत्म कर दिया गया। पिछले एक साल से यहां कोई स्वैâनिंग मशीन मौजूद नहीं है। नतीजतन, पार्सलों की जांच अब सिर्फ ‘रैंडम चेकिंग’ के सहारे की जा रही है। केवल संदिग्ध लगने वाले पार्सलों की ही जांच होती है, जबकि कॉन्ट्रैक्ट क्यों तोड़ा गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
गायब हो रहे पार्सल
सूत्रों के मुताबिक, कमजोर सुरक्षा के कारण कई बार पार्सल गायब होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। खुले क्षेत्र और सीमित निगरानी के चलते चोरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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