तमिलनाडु में आखिरकार सत्ता परिवर्तन हो गया। दक्षिण भारत में राजनीति और सिनेमा का रिश्ता नया नहीं है। एम.जी. रामचंद्रन, जयललिता, रामाराव ने अभिनय के दम पर वोट मांगे और बार-बार मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हुए, लेकिन हाल के समय में तमिलनाडु में जो सुपरस्टार रजनीकांत, कमल हासन को नहीं जमा, वह अभिनेता विजय थलपति ने करके दिखाया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में जब विजय ने शपथ ली, तब तमिलनाडु के युवाओं ने जश्न मनाया। देशभर से विजय पर शुभकामनाओं की वर्षा हुई, लेकिन तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री स्टालिन ने नए मुख्यमंत्री के कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देकर संस्कृति और संयम की नई मिसाल कायम की। विजय की सरकार स्थापित हो, इसके लिए कांग्रेस ने समर्थन दिया। कांग्रेस की इस भूमिका के कारण स्टालिन की द्रमुक पार्टी नाराज हो गई और इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने का निर्णय लिया। द्रमुक पार्टी निर्णय लेने में जल्दबाजी कर रही है, क्योंकि इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने से तमिलनाडु की वर्तमान राजनीतिक स्थिति नहीं बदलेगी। उलट द्रमुक ही राष्ट्रीय राजनीति में एकाकी पड़ जाएगी। तमिलनाडु में द्रमुक और अन्ना द्रमुक इन दो प्रमुख पार्टियों के बीच ही आज तक लड़ाई होती आई है। इसके अलावा हर पांच साल में तमिलनाडु में हमेशा सत्ता परिवर्तन होता आया है। इस बार भी सत्ता परिवर्तन हुआ, लेकिन विजय की ‘टीवीके’ पार्टी के पक्ष में तमिल जनता खड़ी रही। स्टालिन ने जनमत का पैâसला स्वीकार किया और अंतत: विजय थलपति को शुभकामनाएं दीं। बेशक, सरकार की स्थिरता के लिए नई सरकार को बाहर से समर्थन देना अधिक उचित रहता। क्योंकि दक्षिण के प्रमुख राज्य में भाजपा और मोदी जैसे नेताओं को
रोकने का यही मार्ग
है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही विजय थलपति ने तमिल जनता की भावनाओं को ही छुआ। ‘तमिलनाडु की आठ करोड़ जनता ही मेरा परिवार है। मेरे इसी परिवार के लिए अब से मैं काम करूंगा,’ ऐसा उन्होंने कहा। थलपति के इस वक्तव्य से देश में नई तरंगें उठी हैं। १२ साल पहले प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोदी ने ऐसा ही वक्तव्य दिया था। मोदी ने ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ का नारा तब दिल्ली से दिया था। थलपति ने यही अत्यंत दृढ़ता से कहा। ‘मुझे जनता का एक पैसा भी नहीं चाहिए। मेरे विधायकों और मंत्रियों से भी मेरा यही कहना है। भ्रष्टाचार, जनता के पैसों की लूट सहन नहीं करूंगा।’ मुख्यमंत्री के रूप में थलपति ने जिस फाइल पर पहली दस्तखत की, वह घरेलू उपभोक्ताओं को २०० यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की थी। इसका फायदा सीधा मध्यमवर्ग को होगा। तमिलनाडु में युवाओं में नशीले पदार्थों के सेवन का प्रमाण बढ़ा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री थलपति ने कठोर नीति अपनाने का निर्णय लिया। ड्रग्स का जाल पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए विशेष टास्क फोर्स की स्थापना करने के आदेश दिए। पुलिस विभाग में महिला सुरक्षा विंग स्थापित करने का निर्णय उन्होंने लिया। विजय थलपति का बतौर मुख्यमंत्री पहला भाषण भावनात्मक और नाटकीय था। पर्दे के हीरो जैसा था। उसी अंदाज में वे बोले, ‘मैं राजकुमार नहीं हूं या कोई फरिश्ता नहीं हूं। मैं आपकी तरह ही सामान्य आदमी हूं। राज्य पर १० लाख करोड़ के कर्ज का पहाड़ है। इसलिए आर्थिक अनुशासन पालना होगा।’ नया आने वाला प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री साधारणत: इसी पैटर्न के भाषण देता है, हंसी और तालियां बटोरता है। देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के
मुख्यमंत्री पद की शपथ
लेकर मंच से नीचे उतरे और दो दिनों बाद इंडिगो के इकोनॉमी क्लास से नागपुर गए, तब उनके भी सादगी की प्रशंसा हुई थी। जमीन से जुड़े इंसान के रूप में उन पर स्तुति सुमन बरसाए गए। मगर आगे उनके भीतर के सामान्य, निष्कपट इंसान का राजनीति ने, सत्ता ने कैसा कचरा किया, यह सबने देखा है इसलिए सादगी की बातें शासक न ही करें तो बेहतर है। थलपति नए हैं और उनके पास किनारे का बहुमत है। मोदी-शाह जैसे नेता दिल्ली में बैठे रहते हुए थलपति को वह स्थिरता मिलने देंगे, इसकी संभावना नहीं है। तमिलनाडु के स्वाभिमान की बात उन्होंने की। वर्तमान दिल्ली के आगे न झुकना ही वर्तमान में स्वाभिमान की परिभाषा है। थलपति ईसाई हैं, लेकिन ‘मैं सर्व धर्मों का हूं। उन्हें सुरक्षा देना मेरा कर्तव्य है’ ऐसा उन्होंने कहा। विजय थलपति के मुख्यमंत्री पद के शपथ समारोह में पहले ‘वंदे मातरम’, फिर ‘जन गण मन’ यह राष्ट्रगान और बाद में तमिल राज्यगीत बजाया गया। इसके जरिए उन्होंने यह दिखाया कि राष्ट्रीय भावना प्रथम है। उधर पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के शपथ समारोह में मात्र ‘वंदे मातरम’ नहीं बजाया गया। जिस ‘वंदे मातरम’ का जन्म बंगाल में हुआ, उस ‘वंदे मातरम’ को १५० साल पूरे हुए इसलिए मोदी ने संसद का विशेष अधिवेशन बुलाया था, लेकिन बंगाल के मुख्यमंत्री पद के शपथ समारोह में भाजपा को ‘वंदे मातरम’ का विस्मरण हो गया। भाजपा का कामकाज ऐसा ही है। तमिलनाडु के निवर्तमान मुख्यमंत्री स्टालिन भाजपा से दूर रहें और वर्तमान मुख्यमंत्री विजय थलपति मोदी-शाह के रेशमी मोहपाश में न फंसें, इसी में तमिलनाडु और देश का हित है। बाकी थलपति धीरे-धीरे अनुभव संपन्न हो ही जाएंगे। थलपति को हमारी शुभकामनाएं।
