अमर झा / भायंदर
मीरा-भायंदर महानगरपालिका में सत्ता संभालते ही भाजपा की महापौर डिम्पल मेहता ने शहर को ‘अवैध निर्माण मुक्त’ बनाने का बड़ा संकल्प लिया था। महापौर ने अवैध निर्माण पर लगाम कसने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की घोषणा करते हुए अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी थी। लेकिन कुछ महीनों की सख्ती के बाद अब यह नीति पूरी तरह फुस्स होती नजर आ रही है। शहर के कई हिस्सों में फिर से अवैध निर्माण धड़ल्ले से शुरू हो गया है और मनपा प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
महापौर बनने के बाद अपनी पहली समीक्षा बैठक में डिम्पल मेहता ने आदेश दिया था कि प्रत्येक प्रभाग अधिकारी हर सप्ताह लिखित प्रमाणपत्र देगा कि उसके क्षेत्र में कोई नया अवैध निर्माण नहीं हुआ है। यदि किसी क्षेत्र में अवैध निर्माण पाया गया या रिपोर्ट झूठी निकली तो संबंधित अधिकारी के निलंबन का प्रस्ताव सीधे महासभा में लाया जाएगा। उस समय इस पैâसले को लेकर मनपा प्रशासन में हड़कंप मच गया था और कुछ समय तक निर्माण माफियाओं पर अंकुश भी दिखाई दिया।
लेकिन अब हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए हैं। सूत्रों के अनुसार प्रभाग समिति १, ४ और ६ में खुलेआम अवैध निर्माण का खेल जारी है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे निर्माण माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई प्रभागों में सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। उनकी जगह वरिष्ठ लिपिकों और क्लर्क वर्ग के कर्मचारियों को प्रभाग अधिकारी की कुर्सी सौंप दी गई है। योग्य अधिकारियों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर कई वार्डों में अवैध इमारतें तेजी से खड़ी की जा रही हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर महापौर की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित रह गई है या फिर मनपा प्रशासन वास्तव में अवैध निर्माण माफियाओं के सामने बेबस हो चुका है।
लिपिकों के भरोसे चल रहा है प्रभाग कार्यालय
मनपा के कई प्रभागों में सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी नियुक्त नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में है। उनकी जगह वरिष्ठ लिपिकों और क्लर्क वर्ग के कर्मचारियों को प्रभाग अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि योग्य अधिकारियों की कमी का फायदा उठाकर निर्माण माफिया सक्रिय हो गए हैं। शहर में चर्चा है कि सत्ता पक्ष और अवैध निर्माण माफियाओं के बीच कथित तालमेल के कारण कार्रवाई ठप पड़ी है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर मनपा अवैध निर्माण रोकने में असफल क्यों साबित हो रही है।
