-‘जीवन रेखा’ चलाने वालों की ही जिंदगी असुरक्षित
-एक ही दिन दो मोटरमैन की हार्ट अटैक से मौत
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा अब खुद गंभीर सवालों के घेरे में है। रोजाना लाखों यात्रियों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने वाले मोटरमैन ही आज असहनीय मानसिक तनाव और थकान के बीच काम करने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि एक ही दिन में उपनगरीय लोकल ट्रेन चलाने वाले दो मोटरमैन की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो जाने से हड़कंप मच गया है। दोनों मोटरमैन के नाम हैं अनुज प्रसाद सिंह और मोहसिन खान। दोनों पश्चिम रेलवे में कार्यरत थे। मोहसिन खान की ड्यूटी के दौरान ही मौत हो गई। एक ही दिन में दो मोटरमैन की जान जाने से मोटरमैन पर बढ़ते काम के अतिरिक्त दबाव का गंभीर मुद्दा फिर सामने आ गया है।
पिछले कई वर्षों से लोकल ट्रेन के मोटरमैन और ट्रेन मैनेजर के काम के समय में सुधार की मांग की जा रही है। मोटरमैन को साल के ३६५ दिन बिना छुट्टी काम करना पड़ता है। वहीं काम का शिड्यूल भी काफी परेशान करने वाला होने से मोटरमैन के स्वास्थ्य का गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है। इसी बीच काम का अतिरिक्त दबाव अब मोटरमैन की जान पर भारी पड़ने लगा है, जिससे चिंता बढ़ गई है। पश्चिम रेलवे मार्ग पर लोकल ट्रेन चलाने वाले अनुज प्रसाद सिंह और मोहसिन खान इन दोनों मोटरमैन की ५ मई को मौत हो गई। अनुज सिंह पटना में थे, तभी उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जबकि मोहसिन खान चर्चगेट पर एक लोकल छोड़ने के बाद दूसरी लोकल चलाने के लिए जा रहे थे। ग्रांट रोड स्टेशन के पास उनके सीने में असहनीय दर्द शुरू हुआ। वहां से उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही देर में दिल का तेज दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।
पश्चिम रेलवे पर रोज करीब ३० लाख यात्री सफर करते हैं। १४१४ लोकल ट्रिप्स का संचालन मात्र ११०० मोटरमैनों के भरोसे किया जा रहा है, जबकि विभाग में करीब १० प्रतिशत कर्मचारियों की कमी है। ट्रेनों की लगातार देरी के कारण मोटरमैनों को दो फेरों के बीच मिलने वाला ४० मिनट का आराम घटकर २० मिनट तक रह जाता है।
