मुख्यपृष्ठखेलआउट ऑफ पवेलियन : पंड्या नाराज या टेक्निकल फॉल्ट?

आउट ऑफ पवेलियन : पंड्या नाराज या टेक्निकल फॉल्ट?

अमिताभ श्रीवास्तव

मुंबई इंडियंस आईपीएल से बाहर हो गई है। मगर इधर हार्दिक पंड्या की नाराजगी चर्चा में छाई हुई है। यह मसला भी सुर्खियां बटोर रहा है। दरअसल, इंडियन प्रीमियर लीग में मुंबई इंडियंस ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मुकाबला २ विकेट से गंवा दिया। इस हार के चलते मुंबई इंडियंस प्लेऑफ की रेस से पूरी तरह बाहर हो गई। मुंबई इंडियंस के बाहर होने के तुरंत बाद कप्तान हार्दिक पंड्या सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गए। हार्दिक पूरी तरह फिट नहीं होने के कारण इस मुकाबले में नहीं खेल पाए थे। हार के बाद हार्दिक पंड्या ने इंस्टाग्राम पर मुंबई इंडियंस को अनफॉलो कर दिया। उस दौरान मुंबई इंडियंस का अकाउंट उनकी फॉलोइंग लिस्ट में दिखाई नहीं दे रहा था। हार्दिक के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोइंग लिस्ट में उनकी अपनी ही टीम नहीं थी। इसके चलते मुंबई इंडियंस और हार्दिक के बीच रिश्तों में खटास की अफवाहें तेजी से पैâलने लगीं। सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट्स वायरल होने लगे और देखते ही देखते मामला ट्रेंड करने लगा। हालांकि, यह मामला ज्यादा देर तक नहीं चला। कुछ ही मिनटों बाद हार्दिक पंड्या की फॉलोइंग लिस्ट फिर से बराबर हो गई और मुंबई इंडियंस का अकाउंट दोबारा नजर आने लगा। अब पैंâस पूछ रहे हैं कि इंस्टाग्राम में कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई थी या हार के बाद हार्दिक की नाराजगी बाहर आ गई?
‘जब अपनी बच्ची को चूमना तो मीनाब को मत भूलना’
यह एक ऐसी नफरत है जिसे चाह कर भी मिटाना मुश्किल नजर आने लगा है। दरअसल, अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी वैâरोलिन लीविट और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक जंग अब एक बेहद इमोशनल मोड़ पर आ गई है। ईरान ने वैâरोलिन को हाल ही में हुए बच्चे के जन्म पर बधाई तो दी, लेकिन साथ में मीनाब स्कूल नरसंहार की याद भी दिला दी। ईरान का यह संदेश अब दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, ‘जब आप अपने बच्चे को चूमती हैं, तो उस प्यार और सुरक्षा को महसूस करते हुए मीनाब स्कूल में मारे गए उन मासूम बच्चों के माता-पिता का दर्द भी याद रखिएगा।’ ‘जब अपनी बच्ची को चूमना, तो मीनाब को मत भूलना’ – यह संदेश एक डिप्लोमैटिक नोट से कहीं ज्यादा, एक कड़ी चेतावनी और विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। यह उस मिसाइल हमले में अमेरिका की कोई भूमिका न होने के पुराने दावे पर भी एक तीखा तंज है, जिसमें करीब १५० लड़कियों की जान चली गई थी।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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