सना खान
इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पूरी जिंदगी दूसरों को संभालने में निकाल देते हैं और धीरे-धीरे खुद अंदर से टूट जाते हैं। बचपन से ही उन्हें समझदार बना दिया जाता है। कम उम्र में ही जिम्मेदारियां उनके कंधों पर रख दी जाती हैं। उन्हें सिखाया जाता है, ‘रोना नहीं’ ‘कमजोर मत बनो’
‘सब सहना सीखो’ और फिर वही लोग धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को दबाना सीख जाते हैं। वो हर किसी की तकलीफ समझ लेते हैं, लेकिन अपनी तकलीफ कभी किसी से कह नहीं पाते। कुछ लोग पूरी जिंदगी सिर्फ इसलिए मुस्कुराते रहते हैं, ताकि किसी को यह एहसास न हो कि वो अंदर से कितने थके हुए हैं। उनकी आदत बन जाती है हर किसी का सहारा बनना। हर रिश्ते को बचाना। हर टूटे इंसान को संभालना। लेकिन सबसे दर्दनाक बात यह है कि जब वही लोग टूटते हैं तो उन्हें संभालने वाला कोई नहीं होता। क्योंकि दुनिया हमेशा मजबूत दिखने वाले लोगों का दर्द भूल जाती है। कुछ लोग इतना अकेलापन सह लेते हैं कि एक दिन उन्हें अपनी तकलीफ भी सामान्य लगने लगती है। वो हंसते हैं, बातें करते हैं, काम पर जाते हैं, सब कुछ सामान्य दिखता है। लेकिन अंदर ही अंदर वो हर दिन थोड़ा-थोड़ा बिखर रहे होते हैं और सबसे दुखद बात यह है कि कई बार उन्हें खुद भी समझ नहीं आता कि वो इतना थका हुआ क्यों महसूस कर रहे हैं। क्योंकि मानसिक थकान हमेशा शोर नहीं करती। कभी-कभी वो लंबी खामोशी बन जाती है।
लोगों से दूरी बन जाती है या फिर हर बात पर ‘मैं ठीक हूं, कहने की आदत। इस दुनिया में सबसे ज्यादा टूटे हुए लोग अक्सर वही होते हैं, जो सबसे ज्यादा दूसरों का खयाल रखते हैं। क्योंकि उन्होंने हमेशा अपनी भावनाओं से पहले दूसरों की जरूरतों को रखा होता है। इसलिए अगर आपकी जिंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो हर वक्त सबको संभालता है, तो एक बार उससे भी पूछिए, ‘तुम सच में ठीक हो?’ क्योंकि कुछ लोग कभी अपने लिए जी ही नहीं पाते और एक दिन खुद को खो देते हैं।
