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फिल्मों की शूटिंग से रेलवे पर पैसे बरसे … भीड़ से राहत के लिए लोकल यात्री तरसे

मध्य रेल प्रशासन का यात्रियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं
जेदवी / मुंबई
लोकल ट्रेनों की भीड़, देरी, अव्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब यह साफ हो गया है कि मध्य रेल प्रशासन का फोकस यात्रियों से ज्यादा फिल्म शूटिंग पर है। करोड़ों यात्रियों की जीवनरेखा मानी जाने वाली मध्य रेल के स्टेशन अब धीरे-धीरे बॉलीवुड के स्थायी शूटिंग सेट में बदलते जा रहे हैं।
मध्य रेल ने खुद दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों में फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग से उसे २ करोड़ २९ लाख रुपये से ज्यादा का राजस्व मिला। वर्ष २०२३-२४ में ९४.४५ लाख, २०२४-२५ में ४०.१३ लाख और २०२५-२६ में ९४.६२ लाख रुपये की कमाई हुई। रेल प्रशासन के मुताबिक, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस यानी सीएसएमटी फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बना हुआ है। यहां स्लमडॉग मिलियनेयर, चेन्नई एक्सप्रेस, रब ने बना दी जोड़ी, द लंच बॉक्स जैसी फिल्मों और कई विज्ञापनों की शूटिंग हुई। वहीं वाडी बंदर यार्ड में कमीने और सक्रेड गेम्स जैसे प्रोजेक्ट शूट हुए, जबकि चौक स्टेशन सलमान खान की फिल्म दबंग के लिए इस्तेमाल किया गया। दादर, सायन, पनवेल, कॉटन ग्रीन और सनपाड़ा जैसे व्यस्त स्टेशनों पर भी लगातार शूटिंग होती रही। रेलवे प्रशासन ने विशेष रूप से आप्टा रेलवे स्टेशन को बॉलीवुड का पसंदीदा स्टेशन बताया है। पनवेल-रोहा मार्ग पर स्थित यह स्टेशन दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, रंग दे बसंती, पीके, बंटी और बबली जैसी फिल्मों का अहम हिस्सा रह चुका है। मध्य रेल के आंकड़ों के अनुसार, केवल आप्टा स्टेशन से ही पिछले तीन वर्षों में ८५.५५ लाख रुपये का राजस्व मिला, जो कुल फिल्म शूटिंग आय का ३७ प्रतिशत से अधिक है। हाल ही में अभिनेता अनुपम खेर ने भी अपनी फिल्म फ्लिकर की शूटिंग के दौरान आप्टा स्टेशन पर पुरानी यादें ताजा कीं और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की शूटिंग को याद किया।

सिंगल विंडो सिस्टम भी खोले
मध्य रेल ने फिल्म शूटिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम भी तैयार कर रखा है, ताकि प्रोडक्शन हाउसों को अनुमति आसानी से मिल सके। प्रशासन ने सीएसएमटी, आप्टा, पनवेल, चौक, नेरल, माथेरान, लोनावला, खंडाला, वठार और सतारा जैसे स्टेशनों को शूटिंग के लिए खुला निमंत्रण दिया है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जिस रेल नेटवर्क में रोज लाखों यात्री भीड़, धक्का-मुक्की और अव्यवस्था से जूझ रहे हैं, वहां रेलवे प्रशासन की प्राथमिकता आखिर यात्रियों की सुविधा है या फिल्मों से होने वाली कमाई?

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