डॉ. ममता शशि झा
मुंबई
इंद्र भगवान आब चैन सं स्वर्ग लोकमे नाना तरहक नब-नब नृत्य देखईत, गीत सुनईत अपन समय बिता रहल छलाह। आब कोनो राक्षहक उपद्रव हुनका गद्लेदी लेल नहीं होई छलई। आब संसदमे कुर्सी के लेल लोक सब लड़ई छला, कियेक ते जिनका ओ कुर्सी भेटि जाय छलनि ओ इंद्रक स्वर्ग लोक सं बेसी सुख-सुविधा, रास-रंगमे अपन समय बितबई छलाह। हुनका सबहक लेल इंद्रक गद्दी आउटडेटेड भे गेल छलनि। ताहि सं आब कोनो तरहक उपद्रवी सबहक डर नहिं छलनि। ने कोनो ऋषि-मुनि आ ने पहिने जकां क्यो संयमी, सदाचारी घोर तपस्वी योगी छलखिन जिनका स कोनो तरहक स्वर्ग लोक के हुनकर गद्दी के खतरा छलनि। अनेक बाबा सब प्रैफेशनली ट्रेनिंग ले के लोक सबके अपना माया जालमे फंसाब लेल आपसेमे प्रतिद्वंद्वी बनल छलखिन, हुनका तक जेबाक ककरो इच्छा नहिं छलनि। ओहो सब राजा- महाराजा जकां या कहि ते स्वर्ग सनक अनेको जगह पर आश्रम खोलि लेने छला, जाहिमे योग आ मोनक शांति के मार्ग पर ले जेबाक लेल बहुत रास क्रिया-प्रक्रियामे बंधन मुक्तिके नाम पर लोक सबके ओझरा के राखल जाय छई आ सम्मोहित के क नीक मोट पाई कमाई छथिन, सेहो टेक्स फ्री!!
बाब आ अपना सबके साधु-संतक नाम सं संबोधित कर बला बाबा सबहक व्यापार सौंसे देश-विदेशमे पसरल छनि जाहिसं विदेशी मुद्रामे धनक अर्जन करई जाई छथिन, मोटगर आमदनी के कारण हुनकर सबहक रहन-सहन इंद्रक स्वर्ग सं बेसी बढ़ि क छलनि। हुनका सबके बुझल छनि जे लोक सबके ठगे आ धुरफंदी के काज कर के कारण नर्वेâमे स्थान भेटतनि, ताहि दुआरे स्वर्गक आनंद ओ सब पृथ्वीये पर लेब चाहईत छथिन। हिनकर सबहक कर्म देखि के आ धर्मराजक रिपोर्ट के आधार पर इंद्र देव निश्चिंत छला जे मुईला के बादो हिनका सबके स्वर्ग नहिं भेटतनि ताहि दुआरे इ सब मुईला के बादो हमरा तक नहिं आबि पेता!!
मुदा अहि तरहक पृथ्वी लोकमे आयल परिवर्तनक कारण अप्सरा सब उदास आ दुखी रहई छलि। हुनकर सबहक अस्तित्व खतम होबाक खतरा बुझना जाई छलनि। क्यो सद्चरित्र तपस्वी नहिं रहि गेला के कारण नबका तुरिया के अप्सरा सबके ककरो तपस्या भंग करके मौका नहि भेटला के कारण, प्रसिद्धि नहिं भेट रहल छलनि। जे क्यो कनि मनि अनशन करबो करई छलखिन ते पृथ्वी वासिए सबहक जाल आ प्रलोभनमे ओझरा के अपन बात पर अडिग नहिं रहि पबई छलखिन!! अप्सरा सब रंभा, उर्वशी, मेनका, वर्चा, अरुणा केशिनी आ तिलोत्तमा के कथा सुनि-सुनि क पहिने त उत्साहित होई छलथि मुदा आब हतोत्साहित भे जाय छलथि आ इंतजारमे छथ एकटा विश्वामित्रके, राजा पुरुरवाके आ समुद्र मंथन के!
