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मुंबई मेरी जान : क्या बोलता है भिड़ू? …अपन लोग की तो वाट लगनेवाली है!

मनमोहन सिंह

अबी कल-परसों की बात है, दूध का प्राइस ने अपना भेजा प्रâाय किया था और अब ये लो श्उथ् ने सीधा ‘गुगली’ डाल दिया। मुंबई की लाइफलाइन बोले तो.. ओ ट्रेन वाले भाई बुरा मत मानो अपन को मालूम है तुम लोग पैइला लाइफ लाइन है, अपनी ण्र्‍उ अब २ रुपए महंगी होकर `८४ किलो हो गई है। बॉस, ये सुनके ही फट गई है। मिडिल क्लास पब्लिक का सीन तो अब एकदम ‘मोये-मोये’ वाला हो गयेला है।
अभी तो भीड़ू फुल ऑन राडा होनेवाला है! भाई, मुंबई और श्श्R के रास्ते पे जो १२.८ लाख गाड़ी दौड़ रहेली हैं न, उनमें से मैक्सिमम इसी गैस पर जिंदा है। अब पौने पांच लाख ऑटो और डेढ़ लाख काली-पीली वाले जब मीटर गिराएंगे तो अपने दिल की धड़कन भी ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ मोड में भागनेवाली है। ऑटोरिक्शा वालों का वैैâलकुलेशन एकदम सिंपल है हर किलोमीटर पर उनका `१.०३ का एक्स्ट्रा खर्चा बढ़ गया। मतलब तो समझ रहे हो न? अब स्टेशन से घर जाने के लिए जो अपन छुट्टा पैसा ढूंढते थे, अब वो ‘छुट्टा’ भी अपनी जेब से गायब होने वाला है। अरे अपन को भी मालूम है बहुत लोग सीधा ऑनलाइन पेमेंट करता है, लेकिन पैसा तो जाते ही है न? अपने को पक्का खबर है ये ऑटोरिक्शा और टैक्सी यूनियन वाले लोग अभी से भाड़ा बढ़ाने की ‘प्लानिंग’ में लग गइले हैं।
सिर्फ ऑटोरिक्शा, टैक्सी ही नहीं, अपनी लाल-लाल ँEएऊ की बसें और एऊ औ बोले तो लाल परी भी इसी झटके की चपेट में हैं। ऊपर से जो टेंपो भाजी-पाला और राशन लेकर मार्वेâट आते हैं, उनका भाड़ा बढ़ेगा तो उसका डायरेक्ट असर किस पे पड़ेंगा? अरे सीधा असर अपनी थाली पर पड़ेंगा न। मतलब, पेट पे भात नई और पिछवाड़े पे पूरा-पूरा लात! ‘जेन-जी’ लैंग्वेज में बोले तो, मुंबईकरों की सिचुएशन एकदम ‘कन्फ्यूजिंग’ और ‘स्ट्रेसफुल’ हो गई ली है। पब्लिक की तो बैंड बज गई!
असली सवाल तो ये है, मामू! अपन मुंबईकर लोग वैसे ही लोकल की गर्दी और ट्रैफिक के बीच ‘सर्वाइवल मोड’ में जीते हैं। ऊपर से ये महंगाई का तड़का लाइफ को एकदम ‘अनफेयर’ बना रहा है। वेस्ट एशिया में क्या ‘लफड़ा’ चल रहा है, उससे अपने को क्या लेना-देना? लेकिन नहीं, ग्लोबल मार्वेâट का पूरा बिल तो अपने को ही भरना पड़ेगा न!
सरकार को अब इस पर कुछ ‘कड़क’ सोचना पड़ेंगा, नहीं तो फिर अपन सोचेंगा! वरना आम आदमी का तो जीना एकदम ‘मुश्किल’ हो जाएंगा। अब देखने को ये मांगता ये कि भाड़ा कितना बढ़ता है या फिर पब्लिक को कुछ ‘रिलीफ’ मिलता है। तो भाई जबतक, अपना बेल्ट टाइट कर लो, क्योंकि आने वाले दिन एकदम ‘हैवी’ होनेवाले हैं! गर्मी के जैसे! खतरनाक। बोले तो अली नो नो… अल-नीनो!

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