मुख्यपृष्ठनए समाचारचुनाव आते ही यूपी में नौकरियों का लॉलीपॉप

चुनाव आते ही यूपी में नौकरियों का लॉलीपॉप

उत्तर प्रदेश में शिक्षकों समेत करीब ८५ हजार पदों पर भर्ती की तैयारी की खबर बेरोजगार युवाओं के लिए राहत जैसी लग सकती है, लेकिन सवाल यह है कि वर्षों से खाली पड़े पद अचानक चुनाव नजदीक आते ही सरकार को क्यों याद आते हैं? अगर स्कूलों, महाविद्यालयों और इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी थी, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर इतने वर्षों तक क्यों पड़ने दिया गया? अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों, राजकीय इंटर कॉलेजों और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में रिक्त पदों को भरना सरकार का नियमित दायित्व है, कोई चुनावी उपहार नहीं। लेकिन हमारे यहां भर्ती प्रक्रिया अक्सर घोषणा, विज्ञापन, परीक्षा, विवाद, कोर्ट और लंबित परिणामों के चक्र में फंस जाती है। नतीजा यह होता है कि बेरोजगार युवा उम्मीदों के सहारे उम्र गंवाते हैं और स्कूलों में बच्चों को पर्याप्त शिक्षक नहीं मिल पाते। चुनाव से पहले बड़ी भर्ती घोषणाएं सत्ताओं का पुराना राजनीतिक औजार रही हैं। युवाओं को रोजगार का सपना दिखाकर माहौल बनाया जाता है, पर असली कसौटी घोषणा नहीं, नियुक्ति पत्र है। सरकार को स्पष्ट बताना चाहिए कि कितने पद किस विभाग में खाली हैं, विज्ञापन कब निकलेगा, परीक्षा कब होगी, परिणाम कब आएगा और नियुक्ति कब तक मिलेगी।

अन्य समाचार