-ऐप हटाने का आदेश, बाइक टैक्सी कारोबार पर लटकी तलवार
सरनाईक ने कहा कि कंपनियों ने नियमों को नजरअंदाज कर हजारों पेट्रोल बाइक सड़क पर उतार दीं और बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार शुरू रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रोजगार जरूरी है, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा उससे कहीं ज्यादा जरूरी है।
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं पर अब तक का सबसे बड़ा और सबसे कड़ा प्रहार किया है। राज्य में धड़ल्ले से चल रही ओला, उबर और रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने गूगल और एप्पल को इन कंपनियों के ऐप्स तत्काल ब्लॉक और हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस पैâसले से देशभर के डिजिटल ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हड़कंप मच गया है।
सरकार का आरोप है कि ये कंपनियां बिना वैध परमिशन, बिना लाइसेंस और नियमों की खुली धज्जियां उड़ाकर हजारों पेट्रोल बाइक सड़कों पर दौड़ा रही थीं। इतना ही नहीं, महिला सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवालों और लगातार बढ़ती शिकायतों ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने १२ मई को महाराष्ट्र साइबर विभाग को पत्र लिखकर इन ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद १५ मई को साइबर विभाग ने गूगल और एप्पल को आधिकारिक नोटिस भेज दिया। नोटिस में साफ कहा गया है कि ओला, उबर और रैपिडो की बाइक टैक्सी सेवाएं महाराष्ट्र में गैरकानूनी तरीके से चलाई जा रही हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो गूगल और एप्पल पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल
सरकार ने दावा किया है कि इन बाइक टैक्सी सेवाओं में यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ड्राइवर वेरिफिकेशन, इंश्योरेंस, सुरक्षा प्रोटोकॉल और इमरजेंसी सिस्टम बेहद कमजोर पाए गए हैं। हाल ही में बाइक टैक्सी यात्रा के दौरान एक महिला यात्री की मौत और कई दुर्व्यवहार की घटनाओं ने सरकार की चिंता बढ़ा दी। राज्य के कई पुलिस थानों में बाइक टैक्सी चालकों के खिलाफ शिकायतें दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
हजारों पेट्रोल बाइक
उतारकर किया अवैध कारोबार
प्रताप सरनाईक ने कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने केवल इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी को अस्थायी मंजूरी देने की बात कही थी, ताकि प्रदूषण कम हो सके। कंपनियों को आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए समय भी दिया गया था, लेकिन किसी ने नियमों का पालन नहीं किया।
