-अंधेरी से बोरीवली के बीच रात में रेंगती हैं लोकल ट्रेनें
-पांचवीं-छठी लाइन के दावों की निकली हवा
जेदवी / मुंबई
एक समय था जब पश्चिम रेलवे की पंक्चुअलिटी की मिसाल दी जाती थी। मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली वेस्टर्न रेलवे की लोकल सेवा समय पर चलने और सुविधाजनक सफर के लिए पहचानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में पूरी व्यवस्था चरमराती दिखाई दे रही है। लगातार लेट होती लोकल ट्रेनें, अचानक रद्द होनेवाली सेवाएं और बेकाबू भीड़ ने यात्रियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
दिसंबर से जनवरी के बीच बोरीवली में पांचवीं और छठी लाइन के कार्य के दौरान रेलवे प्रशासन ने दावा किया था कि काम पूरा होने के बाद लोकल ट्रेनों का टाइम टेबल सुधरेगा और पंक्चुअलिटी बेहतर होगी, लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यात्रियों का आरोप है कि पहले की तुलना में अब ट्रेनें और ज्यादा देरी से चल रही हैं। रोजाना सफर करनेवाले यात्रियों के मुताबिक, पीक आवर में लोकल ट्रेनें आधे घंटे तक लेट चल रही हैं। रात के समय भी हालात बदतर बने हुए हैं। कई ट्रेनें अंधेरी से बोरीवली के बीच लंबे समय तक सिग्नल पर खड़ी रहती हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रोजाना की लेटलतीफी से यात्री त्रस्त
दादर से भायंदर तक सफर करने वाले पंकज कुमार का कहना है कि आजकल रोज ट्रेन की लेटलतीफी के कारण वह आधे घंटे देर से घर पहुंचते हैं, जिसकी वजह से उन्हें ऑटो में भी अतिरिक्त किराया खर्च करना पड़ता है। रोजाना सफर करनेवाली सुरेखा मोरे ने बताया कि पश्चिम रेलवे का टाइम टेबल अब पूरी तरह बिगड़ चुका है। इसकी वजह से उन्हें रोज सुबह ऑफिस पहुंचने में देरी होती है, वहीं शाम को घर भी करीब आधे घंटे की देरी होती है।
आखिर क्या है समस्या?
यात्रियों का कहना है कि आखिर अंधेरी से बोरीवली के बीच रात में ऐसी कौन-सी समस्या है, जिसकी वजह से ट्रेनों को बार-बार रोका जाता है। भायंदर तक पहुंचते-पहुंचते लोकल ट्रेनें करीब आधे घंटे लेट हो जाती हैं। उनका आरोप है कि यह कोई एक दिन की समस्या नहीं, बल्कि हर दिन की परेशानी बन चुकी है। लगातार बिगड़ती पंक्चुअलिटी को लेकर यात्रियों में अब गहरी नाराजगी फैलती जा रही है।
ट्रेनें लेट और रद्द होने से बढ़ीं मुश्किलें
यात्रियों का कहना है कि हाल के दिनों में ट्रेनों के रद्द होने की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। इसके चलते प्लेटफॉर्म पर भीड़ बढ़ रही है और धक्का-मुक्की की स्थिति बन रही है। दूसरी ओर रेलवे द्वारा लगातार एसी लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने से नॉन-एसी ट्रेनों में सफर करनेवाले यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। रेलवे भले ही एसी लोकल को आधुनिक सुविधा बता रहा हो, लेकिन सामान्य यात्रियों का आरोप है कि नॉन-एसी ट्रेनों की जगह एसी लोकल बढ़ाने से आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे प्लेटफॉर्म पर अफरातफरी मचती है और भीड़ का दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है।
