एम. एम. एस.
लोकतंत्र के मंच पर ‘शपथ ग्रहण’ नाम की जो नौटंकी होती है, उसकी छिपी हुई पटकथा एक बार फिर मजेदार मोड़ पर आ गई है। वेस्ट बंगाल के नए सीएम सुभेंदु अधिकारी ने राजभवन में बंगाली में भारी-भरकम शब्दों के साथ कसम खाई कि वे बिना किसी ‘राग-द्वेष’ के ‘सभी प्रकार के लोगों’ की सेवा करेंगे। लेकिन कैमरे की लाइट बुझते ही और चुनावी जीत का गुलाल उड़ते ही, रिस्पेक्टबल सीएम जी को अचानक याद आया कि ‘सभी प्रकार’ का मतलब तो सिर्फ ‘एक प्रकार’ होता है! उन्होंने साफ कह दिया वे केवल हिंदुओं के लिए काम करेंगे।
सीएम के इस त्वरित ‘हृदय परिवर्तन’ को देखकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने उन्हें आड़े हाथ लेते हुए एक कड़क चिट्ठी लिख मारी है। मौलाना ने बिना कोई हंगामा किए, सीधे शुभेंदु बाबू को उनके अपने ही शब्दों के जाल में लपेट लिया है। मौलाना मदनी ने सीएम की इस अनोखी ‘सेलेक्टिव’ विकास नीति पर चुटकी लेते हुए पूछा है कि सरकार अब प्रकृति को कब से ट्रेनिंग देना शुरू कर रही है? मौलाना ने याद दिलाया कि हुगली नदी बड़ी नासमझ है, वह नीचे बहते वक्त यह पूछना भूल जाती है कि पानी पीने वाला तिलक लगाता है या पहनता है टोपी? यही हाल बंगाल की हवा का भी है, जो किसी के फेफड़ों में घुसने से पहले उसका ‘ईमान’ चेक करने की तमीज नहीं सीख पाई है। व्यंग्य के तीखे बाण छोड़ते हुए मदनी ने कहा कि अगर अस्पताल का डॉक्टर और स्कूल का मास्टर भी सीएम की तरह केवल ‘एक ही चश्मे’ से देखने लगे तो फिर बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनने से कोई नहीं रोक सकता! एक तरफ देश ‘विश्व गुरु’ बनेगा और उनका वेस्ट बंगाल ‘सोनार बांग्ला’!
इस पूरे घटनाक्रम में दिल्ली में बैठे बड़े साहबों का ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ वाला नारा अचानक बंगाल के बॉर्डर पर आकर दम तोड़ता नजर आ रहा है। मौलाना मदनी ने तंज कसा है कि कोई जरा पीएम मोदी से पूछे कि क्या उनके इस ग्लोबल नारे का बंगाल वाला रीचार्ज खत्म हो गया है? या फिर नए सीएम ने अपनी पार्टी की ही गाइडलाइन को ‘फिल्टर’ कर दिया है? चिट्ठी का लब्बोलुआब यह है कि मौलाना ने सीएम से कहा है, ‘शुभेंदु बाबू, आपने जो ८० फीसद बनाम २० फीसद का गणित लगाया है, हम उसमें भी राजी हैं। आप बस ईमानदारी से काम करके दिखा दीजिए। सड़कें बनेंगी तो गाड़ियां सबकी दौड़ेंगी, अस्पताल चलेंगे तो इलाज सबका होगा।
