– एसबीआई की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
– रुपए का लुढ़कना चिंता का विषय
-देश में महंगाई पर काबू करना मुश्किल
सामना संवाददाता / मुंबई
महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों की जेब पर अब र्इंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ा है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर ३ रुपए की बढ़ोतरी की है। लेकिन यह बढ़ोतरी सिर्फ ‘ट्रेलर’ मानी जा रही है और आने वाले समय में र्इंधन के दाम और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने इस आशंका को और मजबूत कर दिया है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।
एसबीआई की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर हुआ तो हाल ही में की गई कीमत बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को मिला राहत का फायदा पूरी तरह खत्म हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव है। एसबीआई की ‘इकोरैप’ रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर ३-३ रुपए की बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी से कंपनियों को लागत से कम कीमत पर र्इंधन बेचने से होने वाले नुकसान में करीब ५२,७०० करोड़ रुपए की कमी आने की उम्मीद थी। यह राशि वित्त वर्ष २०२६-२७ में अनुमानित कुल नुकसान का लगभग १५ प्रतिशत है।
अगर रुपया और गिरता है तो…
एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर रुपया मौजूदा स्तर से सिर्फ २ पॉइंट और नीचे गिरता है तो कीमत बढ़ोतरी से कंपनियों को मिलने वाली अतिरिक्त आय कच्चे तेल के आयात खर्च में ही खत्म हो जाएगी। इस बीच, सरकारी तेल कंपनियों को फिलहाल रोजाना करीब १,००० करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि सालाना स्तर पर यह नुकसान बढ़कर ३.६ लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
