मुख्यपृष्ठस्तंभमोदी राज में २२ लाख छात्रों का भविष्य हासिये पर!

मोदी राज में २२ लाख छात्रों का भविष्य हासिये पर!

के. पी. मलिक

नीट एमबीबीएस बनने के लिए प्रवेश परीक्षा है। इसमें इस साल देशभर से २२ लाख विद्यार्थी बैठे थे। इस परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जिस कारण इसे रद्द किया गया इसलिए उनकी मेहनत और उनके कारण उनके परिवारों को जो भी आर्थिक मुसीबतें झेलनी पड़ीं, वह सारी मेहनत बेकार गई।
ये २२ लाख परिवार यानी कम से कम ८० लाख से एक करोड़ मतदाता। ये कौन हैं? मुख्य रूप से देश के निम्न, मध्यम, उच्च-मध्यम और उच्च वर्ग के परिवार। यानी देश की १४६ करोड़ की जनसंख्या में से जो लगभग साढ़े चार करोड़ लोग आयकर भरते हैं, उनमें से ही अधिकांश परिवार। याद रहे कि भाजपा का यह सबसे मजबूत समर्थक वर्ग है राजनीतिक और आर्थिक रूप से, ऐसा देश के सभी राजनीतिक विशेषज्ञ वर्षों से कहते आ रहे हैं।
देश की अखंडता के लिए भयानक रूप से नुकसानदेह कल्पना का सबसे बड़ा समर्थक वर्ग यही है। इसका प्रमाण यह रहा, पश्चिमी अमदाबाद के सभी इलाकों में रहने वाले तुलनात्मक रूप से धनवान लोगों के निर्वाचन क्षेत्रों में पिछले २५ वर्षों से सभी चुनावों में भाजपा ही जीतती आई है। ऐसा ही लगभग पूरे देश में हुआ है। इसी वर्ग ने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बारे में निरर्थक और फालतू बातें गढ़ने और पैâलाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अब क्या ये करोड़ मतदाता देश में होने वाले आगामी किसी भी चुनाव में भाजपा को वोट देंगे? हां, क्योंकि उन्हें तो हिंदू राष्ट्र चाहिए, उन्हें पेपर लीक सहन करने में कोई आपत्ति नहीं है। इन २२ लाख परिवारों के संविधान की धारा-२१ में लिखे गए शांति से जीवन जीने के अधिकार का क्या? अरे, लेकिन इस वर्ग को ऐसे अधिकारों की कोई चिंता ही नहीं है। उसे संविधान क्या है और लोकतंत्र या नागरिक अधिकारों के बारे में अधिकतर कोई परवाह नहीं है। क्योंकि उसे तो शांति से जीना है, लोकतंत्र तेल लेने जाए। अब इसी वर्ग की शांति इस पेपर लीक के कारण छिन गई? क्या वह भाजपा को ही वोट देगा? बिल्कुल, कारण हिंदू राष्ट्र की तरंगमयी (सनकी) कल्पना उनके दिमाग में भाजपा ने अच्छी तरह घुसा दी है!
यह परीक्षा किसने ली? नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने। वह किसने बनाई? २०१७ में मोदी सरकार ने। वह किसके अधीन काम करती है? मोदी सरकार के। तो क्या उसका कोई दोष है? नहीं। मोदी तो नॉन-बायोलॉजिकल (गैर-जैविक) हैं, इसलिए पूरी सरकार ही नॉन-बायोलॉजिकल कहलाएगी। जो नॉन-बायोलॉजिकल होता है वह हवा में होता है, दिखता नहीं या पकड़ा नहीं जाता। तो उसका क्या करना? हाथ में त्रिशूल लेकर पूजा करनी। करते रहो पूजा।
इन २२ लाख में २.७० लाख यानी १२.२७ प्रतिशत विद्यार्थी तो अकेले महाराष्ट्र के हैं। क्या वे महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के दौरान हुई वोट-चोरी के बारे में कुछ बोले? नहीं, उसका कारण यह है कि वे धर्मांधता के नशे में डूबे हुए हैं!
क्या ये मतदाता इस पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन या आंदोलन करेंगे? नहीं, क्योंकि वह तो देशद्रोह कहलाएगा, उससे तो वे अर्बन नक्सल कहलाएंगे! चुपचाप सरकारी विफलताओं को सहन करो, तभी विश्वगुरु बना जा सकता है!

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