मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम : गंभीर यौन अपराधों पर सख्त कानून

कोर्ट-रूम : गंभीर यौन अपराधों पर सख्त कानून

भाग:२४
एड. कनई बिस्वास
यौन अपराध केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध होते हैं। इसीलिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), २०२३ में ऐसे अपराधों पर विशेष सख्ती और कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। धारा ७०, ७१ और ७२ विशेष रूप से गंभीर यौन अपराधों, बार-बार अपराध करनेवालों और पीड़ित की सुरक्षा से जुड़ी हैं।
केस स्टडी – १: ‘सामूहिक अपराध’ (धारा ७०)
एक महिला के साथ कई लोगों ने मिलकर अपराध किया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या एक से अधिक व्यक्ति शामिल थे?
क्या यह योजनाबद्ध था?
पैâसला यह सामूहिक यौन अपराध है और इसमें सबसे सख्त सजा दी जाती है। समझें धारा ७० के तहत: सामूहिक रूप से किया गया यौन अपराध अत्यंत गंभीर माना जाता है।
सजा: आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक।
केस स्टडी- २: ‘बार-बार अपराध’ (धारा ७१)
एक व्यक्ति पहले भी यौन अपराध में दोषी पाया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर वही अपराध किया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या यह व्यक्ति पहले भी दोषी था?
क्या उसने सुधार नहीं किया?
पैâसला उसे और अधिक कठोर सजा दी जाएगी। समझें धारा ७१ के अनुसार: बार-बार अपराध करनेवालों के लिए सजा और भी कड़ी होती है।
केस स्टडी- ३: ‘पीड़ित की सुरक्षा और पहचान’ (धारा ७२)
एक यौन अपराध के मामले में किसी ने पीड़िता का नाम और पहचान सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या पीड़ित की पहचान उजागर की गई?
क्या इससे उसकी सुरक्षा और सम्मान प्रभावित हुआ?
पैâसला यह पीड़ित की सुरक्षा का उल्लंघन है और अपराध है। समझें धारा ७२ के तहत: पीड़ित की पहचान उजागर करना उसकी गोपनीयता का उल्लंघन अपराध है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि यौन अपराधों पर अब जीरो टॉलरेंस नीति है। बार-बार अपराध करने वालों को सख्त सजा मिलेगी और पीड़ित की गरिमा और गोपनीयता की रक्षा सर्वोपरि है। यानी, कानून अब केवल अपराधी को सजा नहीं देता, बल्कि पीड़ित को सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित करता है।
(अगले अंक में: धारा ७३, ७४ और ७५ – ‘महिलाओं के खिलाफ अन्य अपराध और उत्पीड़न’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)

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