मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : मोदीजी; कौन लेगा जनता के प्रति जिम्मेदारी?

दिल्ली लाइव : मोदीजी; कौन लेगा जनता के प्रति जिम्मेदारी?

अरुण कुमार गुप्ता

इंडियन इकोनॉमी की लंका लगी हुई है, लेकिन लगता है कि मोदी सरकार देश चलाने के लिए भी अमेरिका से अनुमति की भीख मांग रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। यही नहीं, पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले भी भारतीय रुपया ११ प्रतिशत गिरा है। देश में पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ऐसी स्थिति में भी मोदी सरकार ने रूस से कुछ दिन और तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति मांगी, लेकिन अमेरिका ने साफ मना कर दिया। संकट के समय प्रधानमंत्री विदेश की सैर कर रहे हैं। उनके मंत्री गायब हैं। अर्थव्यवस्था की लंका लगी हुई है, वित्त मंत्री नदारद हैं। पेपर लीक हो रहे हैं, शिक्षा मंत्री सो रहे हैं। अमेरिका मनमानी करते हुए अपनी मर्जी हमारे ऊपर थोप रहा है, विदेश मंत्री गायब हैं। देश में दिनों-दिन महंगाई और बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, लेकिन मोदी सरकार जनता के प्रति कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। हाल ही में खबर आई की अमेरिका ने अडानी का केस वापस ले लिया है, इससे यह संकेत मिलता है कि अपने मित्र अडानी के लिए मोदी ने शायद अमेरिका से कोई डील की है। जो भी हो, मोदी सरकार की नाकामियों का खामियाजा तो देश की जनता ही भुगत रही है।

दोस्त सबसे पहले!
करीब ४५ साल में भारत का कोई प्रधानमंत्री नॉर्वे नहीं गया, लेकिन हमारे प्रधानसेवक यानी मोदी जी नॉर्वे पहुंच गए। अब देश के लोग समझ रहे होंगे कि मोदी जी नॉर्वे गए हैं तो देशहित में कोई समझौता जरूर किए होंगे, लेकिन मोदी जी के नॉर्वे दौरा का क्रोनोलॉजी कुछ और ही है। यहां हम एक महत्वपूर्ण जानकारी रख रहे हैं। वर्ष १९९० में नॉर्वे के समुद्र में तेल का विशाल भंडार मिला। इस तेल के भंडार से निकलने वाले तेल को बेचकर इकट्ठा होनेवाले पैसे के लिए सोवरन वेल्थ फंड बनाया गया। सोवरन वेल्थ फंड नॉर्वे सरकार की ऐसी संस्था है जिसने दुनिया की करीब ७२ कंपनियों में निवेश किया है। निवेश से आनेवाले पैसे को नॉर्वे सरकार की संकट के समय प्रयोग करने की योजना है। इसी सोवरन वेल्थ फंड ने अडानी की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी में भी निवेश किया था, लेकिन अडानी ग्रीन एनर्जी में वित्तीय अनियमितताओं के कारण उसे २७ फरवरी २०२६ को ब्लैक लिस्ट कर दिया। अब ऐसे में मोदी जी की दोस्त के प्रति जिम्मेदारी बढ़ गई, लेकिन इस बीच देश के पांच राज्यों में चुनाव के कारण प्रचार में व्यस्त होने की वजह से मोदी जी से दौरे में देरी हुई। कहा जा रहा है कि मोदी जी ने नॉर्वे का दौरा किया। इस दौरान दोस्त के लिए जरूर कोई डील की होगी। तभी तो कहते हैं दोस्त के लिए कुछ भी करेगा।

अन्य समाचार