खारबाव बिजनेस पार्क के लिए विशेष नियोजन प्राधिकरण नियुक्त
जेदवी / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र में विकास के नाम पर अब गांवों की जमीनों को बड़े प्रोजेक्ट्स के हवाले करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने खारबाव इंटीग्रेटेड बिजनेस पार्क के विस्तार का एलान करते हुए १० गांवों की जगह अब ४४ गांवों को इस परियोजना के दायरे में शामिल कर लिया है। सरकार इसे आर्थिक विकास और रोजगार का बड़ा कदम बता रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमीन, खेती और गांवों की पहचान खत्म होने की आशंका गहराने लगी है।
१९ मई २०२६ को जारी अधिसूचना के तहत एमएमआरडीए को इस पूरे विस्तारित क्षेत्र का विशेष नियोजन प्राधिकरण नियुक्त किया गया है। इसके बाद अब संबंधित क्षेत्रों में मौजूद अन्य नियोजन संस्थाओं के अधिकार समाप्त हो जाएंगे। यानी आने वाले समय में विकास का पूरा नियंत्रण एक ही एजेंसी के हाथों में केंद्रित होने वाला है। पहले खारबाव इंटीग्रेटेड बिजनेस पार्क में भिवंडी और वसई तालुका के १० गांव शामिल थे, लेकिन अब अतिरिक्त ३४ गांवों को भी इसमें जोड़ दिया गया है। इनमें कई गांव पहले भिवंडी सराउंडिंग नोटिफाइड एरिया में आते थे। अब उन्हें वहां से हटाकर सीधे इस नए बिजनेस पार्क की योजना में समाहित किया गया है।
स्थानीय लोगों को भविष्य व पुनर्वास की चिंता
– भिवंडी-वसई पट्टी पहले ही अव्यवस्थित शहरीकरण, ट्रैफिक, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं के दबाव से जूझ रही है।
– ऐसे में ४४ गांवों को एक विशाल व्यावसायिक क्षेत्र में बदलने की योजना कई नए सवाल खड़े कर रही है।
– ग्रामीणों में यह आशंका भी बढ़ रही है कि आने वाले समय में जमीनों की खरीद, अधिग्रहण और -बिल्डर-औद्योगिक लॉबी का दबाव तेजी से बढ़ सकता है।
– एक तरफ सरकार रोजगार और निवेश की बातें कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को अपने भविष्य, पुनर्वास और अधिकारों की चिंता सता रही है।
